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बाल कविता: इनको करो नमस्ते जी

Published: मंगलवार, 20 मई 2025 (16:52 IST)
आज गांव से आए काका,
इनको करो नमस्ते जी।  
 
जब-जब भी वे मिलने आते,
खुशियों की सौगातें लाते।
यादें सभी पुरानी लेकर,
मिलते हंसते-हंसते जी।
 
याद करो छुटपन के वे दिन,
कैसे बीते हैं वे पल छिन।
बचपन कंधे पर घूमा है,
इनके रस्ते-रस्ते जी।
 
जाते बांदकपुर के मेले।
छह आने के बारह केले।
एक रुपये के दस रसगुल्ले!
मिलते कितने सस्ते जी?
 
काकाजी को खूब छकाया,
गलियों सड़कों पर दौड़ाया।
खोलो-खोलो बेटे खोलो,
स्मृतियों के बस्ते जी।

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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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