suvichar

बच्चों की कविता : सूरज के ठाठ

Updated: शुक्रवार, 15 जनवरी 2021 (16:33 IST)
शाम हुई थका सूरज
पहाड़ों की ओट में
करता विश्राम।
 
गुलाबी, पीली चादर 
बादल की ओढ़े
पंछियों के कोलाहल से
नींद कहां से आए।
 
हुआ सवेरा
नहाकर निकला हो नदी से
पंछी खोजते दाना-पानी
सूरज के उदय की दिशा में।
 
सूर्य घड़ी प्रकाश बिना सूनी
जल का अर्घ्य स्वागत हेतु
आतुर हो रहीं हथेलियां।
 
सूरज के ऐसे ठाठ
नदियों के तट सुप्रभात के संग
देवता और इंसान देखते आ रहे।
 
इंसान ढूंढ रहा देवता
ऊपर देखे तो
देवता रोज दर्शन देते
ऊर्जा का प्रसाद
देते रोज सभी को धरा पर।
 
सूरज के बिना जग अधूरा
ब्रह्मांड अधूरा
प्रार्थना अधूरी।
 
लेखक के बारे में
संजय वर्मा 'दृष्ट‍ि'

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: जानिए इतिहास और इसका महत्व

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर निबंध: जानें भारत की आजादी का इतिहास और महत्व

तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

अगला लेख