biodatamaker

बच्चों की कविता : रेल यात्रा...

Updated: शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016 (15:03 IST)
यदि रेल से बच्चों तुमको,
किसी जगह पर जाना हो।
आधा घंटे पहले घर से,
होकर तैयार रवाना हो।


 
स्टेशन पर जाकर तुमको,
रेल टिकट लेना होगी।
मांगो खिड़की पर बाबू से,
तुम्हें जिस जगह जाना हो।
 
पैसों और टिकट को रखना,
किन्हीं सुरक्षित जेबों में,
ध्यान सदा जेबों पर रखना,
जेबें अगर बचाना हो।
 
भीड़ बहुत होती रेलों में,
कम से कम सामान रखो,
ताकि जल्दी से डिब्बे में,
किसी तरह चढ़ जाना हो।
 
हो सकता है तुरत-फुरत ही,
तुमको जगह न मिल पाए।
हो सकता है जाना तुमको,
खड़े-खड़े पड़ जाना हो।
 
अगर कहीं गुंजाइश दिखती,
कि तुम जाकर बैठ सको।
हो सकता कोई मिल जाए,
जो जाना-पहचाना हो।
 
प्राय: नम्र निवेदन से तो,
लोग जगह दे देते हैं।
किंतु याद रखना होगा,
व्यवहार सदा दोस्ताना हो।
 
यदि राह में कोई मुसाफिर,
कुछ खाने को देता है।
मत खाना यदि देने वाला,
बिलकुल ही अनजान हो।
 
चलती गाड़ी से बच्चों,
मत कभी उतरना जल्दी में।
भले सामने तुमको दिखता,
अपना ठौर-ठिकाना हो।
 
स्टेशन की चाट-पकौड़ी,
कभी भूल से खाना मत।
लेना भोजन बिलकुल सादा,
यदि भूख लगे कुछ खाना हो।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

अगला लेख