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फनी बाल कविता : लोरी

Updated: मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021 (16:42 IST)
- सुरेन्द्र अंचल
 
अक्कड़-बक्कड़ बबे बो,
सो जा कन्नू अब ना रो। 
देऊंगी री ऐसी गुड़िया, घूंघर वाले बाल हो,
देख-देखकर कुन्नू मेरा, नाचे दे दे ताल हो। 
चंदामामा नीचे आओ,
तारे लाओ पूरे सौ।।
 
निंदिया रानी चादर ला, कुन्नू को होले औढ़ा।
सपनों की बगियों में जा, लाएगा मुन्ना घोड़ा।
रास जो खींचे मुन्ना तो
घोड़ा दौड़े अंगुल नौ।।
 
नहीं हठीला कुन्नू मेरा, कहना सबका मानता,
पहले-पहले राजा, देखे कौन है आंखें मूंदता।
सो जा बेटा एक दो...।
अस्सी नब्बे पूरे सौ। 
अक्कड़-बक्कड़ बबे बो,
सो जा कन्नू अब ना रो।

साभार - देवपुत्र 

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