dipawali
✕

कविता : किसान का बेटा

Updated: बुधवार, 2 दिसंबर 2020 (14:38 IST)
agriculture Poem
- संतोष गुप्ता, सुवासरा
 
माना गरीब हूं मैं बेटा किसान का
मैं ही बनूंगा गौरव भारत महान का
 
मेरे घर नहीं तिजोरी कपड़े हैं एक जोड़ी
लेने को पेन-कॉपी नहीं है फूटी-कौड़ी
 
कमजोर बना घर है टूटा हुआ छप्पर है
मजबूत चौखट प्रेम की पर लगी मेरे दर है
 
खजाना भरा है, विचारों की शान का
मैं ही बनूंगा गौरव, भारत महान का
 
अभावों में मैं पला हूं भूख से भी मैं जला हूं
लेकिन ये पाई प्रेरणा सत्यपथ से न टला हूं।
 
न अंग्रेजी सीख पाया, न जीन्स-ट्राऊजर में मचलना
सीखा है मगर मैंने सिद्धांतों पर चलना
 
बनूंगा मैं हिन्द का रखवाला आन का
मैं ही बनूंगा गौरव भारत महान का।
 
साभार- देवपुत्र 

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?

31 अक्टूबर पुण्यतिथि: इंदिरा गांधी की मृत्यु कब, कहां, क्यों और कैसे हुई थी?

वाणी साहित्य उत्सव का आगाज, पहले दिन युद्ध, स्त्री विमर्श और एआई के दौर में लेखन पर हुआ मंथन

वर्ल्ड स्ट्रोक डे: स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही लें चिकित्सकीय सहायता, हर मिनट है कीमती

बौखलाए नेताओं की बेरहमी का ये सबसे निर्दयी उदाहरण है, 200 पेड़ों से हजारों परिंदों के आशियाने उजाड़कर मेट्रो चलाएंगे

अगला लेख