suvichar

नव गीत : फिर सजा मौसम सुहाना

Updated: सोमवार, 21 जून 2021 (15:58 IST)
पेड़ पत्ते डालियों का
मुस्कराना गुनगुनाना
रूप धर बहुरूपिया का
फिर सजा मौसम सुहाना।
 
खेल में अठखेलियों की
धुंध अमराई बनी
बादलों में इंद्रधनुषी
आंख की भौंहें तनी
आम के या नीम के
या पेड़ इमली के तले
दिख रहे हैं दूर से ही
मखमली झूले डले
विघ्न पैदा कर रहा है
बादलों का फनफनाना।
 
तरुणियों पर वार होते
प्रेम की आखेट में
काम बाणों की झड़ी
अंगड़ाइयों की ओट में
दूर पर्वत पर फुहारों की
कतारें नाचती सीं
चोटियों के प्रेम पत्रों की
लिखावट बांचतीं सीं
बादलों की बाहुओं में
बिजलियों का कसमसाना।
 
मनचलों की राजभाषा में
हवाएं बोलती हैं
दिल लगाने का ठिकाना
खोज करती डोलती हैं
ताल सरिता निर्झरों के
वस्त्र गीले तर बतर हैं
कर रहे किल्लोल मस्ती
ये वरुण के नाचघर हैं
है सतत जारी धरा का
सांस लेना मुस्कराना।

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख