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बाल गीत : आम रसीले

Updated: गुरुवार, 9 जून 2016 (12:36 IST)
मीठे-मीठे आम रसीले,
पापा 5 किलो ले आए।


 
थैले पर मीना झपटी है,
टीना ने खींचे दो आम।
 
मल्लू ने जब डांट लगाई,
दोनों की कस गई लगाम।
 
धमा-चौकड़ी उधम सुनकर,
दादाजी भी दौड़े आए।
 
दादी भी शौकीन बहुत है,
बोली आम हमें भी देना।
 
मम्मी-पापा के संग मिलकर,
बच्चों तुम सब मत खा लेना।
 
जब हम, तुम जितने छोटे थे,
सौ-सौ आम अकेले खाए।
 
दादा-दादी वाले युग में,
आम बहुत सस्ते होते थे।
 
एक रुपए में तीन सैकड़ा,
दादा लाकर धर देते थे।
 
जिसको जितने लगे उठाकर,
उसने बिना झिझक के खाए।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
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