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बुंदेली गीत : जादा बच्चों को का करने...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
अब तो समय बदल गओ भैया,
अब बदलो अपने लाने। 
जादा बच्चों को का करने,
अब तो एकई-दो चाने। 


 
जादा भये सो पढ़ने पेहें,
ने ढंग से खा-पी पेहें। 
महंगाई है, बीमारी है,
ने ढंग से बे जी पेहें। 
जादा भीड़ बड़ा दई तो फिर,
समझो पड़ हे पछताने। 
 
एक भओ सो पढ़-लिख जेहे, 
बड़ो आदमी बन जेहे। 
तन-मन खो मजबूत बना कें,
काम भले के कर लेहे। 
 
उनखो तो भूखन मरने हैं, 
जिनके बच्चा मनमाने। 
महंगाई में पढ़बो मुश्किल,
कपड़ा-लत्ता मुश्किल है। 
दाल, चावल, गेहूं, शक्कर की, 
रोज-रोज की किलकिल है। 
 
बिटिया भई तो पड़ा-लिखा कें, 
ओई खो आगे लाने। 
सौ गीदड़ ने कछु काम के,
एक शेर सब पे भारी। 
एक शिवाजी के आबे से,
मुगलों की सेना हारी। 
 
बेटा-बिटिया एकई अच्छे,
भाग्य उनई को चमकाने। 
बेटा भगत सिंह जैसो हो,
बिटिया हो लछमी बाई।
 
मोड़ा-मौड़ी एकई हो जो,
नाम करे ऊंचो भाई। 
अपने ऊपर करे भरोसो,
अपनी ताकत पहचाने। 

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