sawan somwar

बाल कविता: अकड़म बकड़म

Updated: मंगलवार, 7 जुलाई 2026 (17:08 IST)
अकड़म बकड़म दही चटाकन
चिड़िया चूज़े चूं चूं चहकन।
 
नन्हा गोलू दौड़ा आंगन
हंसी बिखेरे प्यारी चुनमुन।
 
गुड़िया रानी पहनें पायल
छम छम छम छम छन छन छन छन।
 
बिल्ली मौसी दुबकी आई
दूध देख कर मन में लपकन।
 
चंदा मामा झांकें खिड़की
तारे गिनती प्यारी गुनगुन।
 
अकड़म बकड़म हंसी ठिठोली
बिट्टू रोता ठन ठन ठन ठन।
 
इंद्रधनुष के सात रंग में
खेल रहा है देखो बचपन।
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

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