ganesh chaturthi

रंगबिरंगी कविता : तितलियां

Updated: शनिवार, 13 जनवरी 2018 (17:27 IST)
जब उड़ेंगी रंग भरेंगी तितलियां,
हवाओं में आकर्षण रहेंगी तितलियां।
 
ढूंढते हो कहां यहां-वहां,
संग फूलों के मिलेंगी तितलियां।
 
लगने दो धूप पंखों को जरा,
उड़ तभी तो सकेंगी तितलियां।
 
मिले बाग-उपवन तो बन जाए बात,
कैसे कांक्रीट में जिएंगी तितलियां।
 
रसोई फूल की जाएगी फ़िज़ूल,
पराग अगर नहीं चखेंगी तितलियां।
 
हवा के संग ही बहते हैं सभी फूल-पत्तियां,
फ़िज़ा से कब तक बचेंगी तितलियां।
 
तेज़ाबी हवा में फूल भी उगलेंगे ज़हर,
कौन जाने फिर कहां रहेंगी तितलियां।
लेखक के बारे में
श्रीमती गिरिजा अरोड़ा
स्वतंत्र लेखिका.... और पढ़ें

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