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बाल कविता : चंदा पीछा करता है

Updated: गुरुवार, 22 जून 2017 (12:35 IST)
अभिषेक कुमार अंबर
मईया अब तुम ही समझाओ
मन में प्रश्न अखरता है
रात होते ही चंदा क्यों
मेरा पीछा करता है।
 
मैं जो चलूं तो चलने लगता
रुक जाऊं तो रुक जाता है
मैं जो हंसू तो हंसने लगता
शरमाऊं तो शरमाता है।
 
मईया बोली सुन रे बेटा,
इसमें नहीं दुराहा है
वैसे भी चंदा तो बेटा
लगता तेरा मामा है।
 
जैसे भौरा रस की खातिर
फूलों पर मंडराता है
अंबर अवनी को बांहों में
भरने को हाथ बढ़ाता है।
 
वैसे ही चंदा भी तुझपर
अपना प्यार लुटाता है
इसलिए वह हर पल
तेरे पीछे-पीछे आता है।
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