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बाल कविता : महाराजा के घर

Updated: बुधवार, 17 जून 2020 (17:52 IST)
Poem on Kids
सुबह-सुबह से सूरज निकला,
खिड़की में से भीतर आया।
 
बोला उठो-उठो अब जल्दी,
क्यों सोए अब तक महाराजा।
 
मैं बोला मैं महाराजा हूं,
तो तुम खिड़की से क्यों आए,
 
चौकीदार खड़ा द्वारे पर,
उसे बताकर क्यों न आएं?
 
आ गए हो चौका बर्तन,
झाड़ू-पोंछा करके जाना।
 
आगे से महाराजा के घर,
बिना इजाजत कभी न आना।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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