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Karwa And Sargi : करवा क्या होता है, किसे कहते हैं सरगी, जानिए यहां

Updated: शनिवार, 23 अक्टूबर 2021 (12:22 IST)
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ का व्रत पति और पत्नी के संबंध पर आधारित है। करवा चौथ के व्रत संबंध में कई लोककथाएं प्रचलित हैं। शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया। इस व्रत को करने से स्त्रियां अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से उसे बचा सकती हैं। इस व्रत को द्रोपदी ने पांडु पुत्र अर्जुन के लिए तब किया था जब वे तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर चले गए थे। अत: यह व्रत परंपरा तभी से चली आ रही है। इस व्रत परंपरा का प्रचलन उत्तर भारत में अधिक है। इस बार यह व्रत 24 अक्टूबर 2021 रविवार को रखा जाएगा। आओ जानते हैं कि करवा चौथ के दिन करवा और सरगी किसे कहते हैं और क्या है इसका उपयोग।
 
 
चौथ का मतलब तो सभी जानते हैं कि वह चतुर्थी तिथि होती है लेकिन करवा क्या होता है यह बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे। दूसरा एक है सरगी। सरगी क्या होता है यह जानना भी महत्वपूर्ण है।
क्या होता है करवा?
1.करवा मिट्टी का एक बर्तन होता है। काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी की वस्तु को करवा कहते हैं।
 
2. कुछ लोग तांबे के बने करवे लाते हैं। इस तरह दो करवे बनाए जाते हैं। 
 
3. करवा में रक्षासूत्र बांधकर, हल्दी और आटे के सम्मिश्रण से एक स्वस्तिक बनाते हैं।
 
4. एक करवे में जल तथा दूसरे करवे में दूध भरते हैं और इसमें ताम्बे या चांदी का सिक्का डालते हैं।
 
5. जब बहू व्रत शुरू करती है, तो सास उसे करवा देती है, उसी तरह बहू भी सास को करवा देती है।
 
6. पूजा करते समय और कथा सुनते समय दो करवे रखने होते हैं- एक वो जिससे महिलाएं अर्घ्य देती हैं यानी जिसे उनकी सास ने दिया होता है और दूसरा वो जिसमें पानी भरकर बायना देते समय उनकी सास को देती हैं। सास उस पानी को किसी पौधे में डाल देती हैं और अपने पानी वाले लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।
7. मिट्टी का करवा महिलाएं इसलिए लेती हैं, क्योंकि उसे डिस्पोज किया जा सकता है। मिट्टी का करवा न हो तो कुछ महिलाएं स्टील के लोटे का प्रयोग भी कर लेती हैं।
 
 
8. यह भी कहा जाता है कि करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री के नाम पर ही करवा चौथ का नाम करवा चौथ पड़ा है। कहते हैं कि करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गांव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान कर रहा था तभी एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा। उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी हुई आई और आकर उसदे मगरम्छ को कच्चे धागे से बांध दिया।
 
 
मगर को बांधकर वो यमराज के यहां पहुची गई और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगरमच्छ ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप नरक में ले जाओ। यमराज बोले, 'लेकिन अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली, 'अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूंगी।' सुनकर यमराज डर गए और उन्होंने मगरमच्‍छ को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु रहने का आशीर्वाद दे दी। तभी से उस महिला को करवा माता कहने लगे।
 
 
क्या होती है सरगी?
1. यह रस्म अक्सर पंजाब प्रांत में मनाई जाती है। कोई भी महिला जब करवा चौथ का व्रत रखती है तो उसकी सास उसे सरगी बनाकर देती है।
 
2. सरगी एक भोजन की थाली है जिसमें खाने की कुछ चीजें होती हैं। जिसको खान के बाद दिनभर निर्जला उपवास रहा जाता है और फिर रात में चांद की पूजा करने के बाद ही खाया जाता है।
3. चूंकि सरगी को खाकर व्रत की शुरुआत की जाती है इसलिए सरगी की थाली में ऐसी चीजें होती है जिसे खाने से भूख और प्यास कम लगती है और दिनभर एनर्जी बनी रहती। इसमें अक्सर सूखे मेवे और फल होते हैं।
 
 
4. सास द्वारा दी हुई सरगी से बहू अपने व्रत की शुरुआत करती है। अगर सास साथ में नहीं हैं, तो वो बहू को पैसे भिजवा सकती हैं, ताकि वो अपने लिए सारा सामान खरीद सके।
 
5. इस सरगी में कपड़े, सुहाग की चीज, फेनिया, फ्रूट, ड्राईफ्रूट, नारियल आदि रखे होते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश और बिहार में इस त्योहार को मनाने का तरीका अलग है।
कब है करवा चौथ? कैसे करें पूजा, जानिए विधि, मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और सामग्री यहां एक साथ


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