मंगलवार, 27 फ़रवरी 2024
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बजरंगबली और हनुमान जी के बीच क्या है अंतर?

बजरंगबली और हनुमान जी के बीच क्या है अंतर? - What is the difference between Bajrangbali and Hanuman ji
Bajarangbali : प्रभु श्रीराम के भक्त रामदूत हनुमानजी का एक नाम बजरंगबली भी है। आखिर उन्हें क्यों कहते हैं हनुमान और क्यों कहते हैं बजरंगबली। दोनों के बीच में क्या है अंतर और क्या इन दोनों में उनका स्वरूप भी है अलग-अलग। क्यों कहते हैं हनुमान और क्यों कहते हैं बजरंगबली? आओ जानते हैं विस्तार से।
 
हनुमानजी : बचपन में हनुमानजी सूर्य को फल समझकर खाने के लिए आतुर हुए थे तो उस दौरान इंद्रदेव ने उन्हें रोकने का प्रयास किया परंतु हनुमानजी किसी के रोके नहीं रुक रहे थे तब इंद्रदेव ने अपना वज्र निकालकर उन पर वार किया जिसके चलते हनुमानजी की ठूड्डी टूट गई थी। ठूड्डी को हनु कहते हैं इसीलिए उनका नाम हनुमान पड़ गया।
 
बजरंगबली : असल में बजरंगबली को वज्रंगबली कहते हैं। हनुमानजी के पास सभी देवी और देवताओं की वरदानी शक्ति है। ठूड्डी टूटने के बाद इंद्रदेव ने उन्हें अपने वज्र की शक्ति प्रदान की थी। इसीलिए हनुमानजी को बजरंगबली कहने लगे। यह भी कहते हैं कि उनका शरीर वज्र के समान है इसीलिए उन्हें बजरंगबली कहते हैं।

हनुमान वज्र कथा :
 
एक दिन मारुती अपनी निद्रा से जागे और उन्हें तीव्र भूख लगी...उन्होंने पास के एक वृक्ष पर लाल पका फल देखा। जिसे खाने के लिए वे निकल पड़े दरअसल मारुती जिसे लाल पका फल समझ रहे थे वे सूर्यदेव थे। वह अमावस्या का दिन था और राहु सूर्य को ग्रहण लगाने वाले थे। लेकिन वे सूर्य को ग्रहण लगा पाते उससे पहले ही हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया। राहु कुछ समझ नहीं पाए कि हो क्या रहा है? उन्होने इंद्र से सहायता मांगी। इंद्रदेव के बार-बार आग्रह करने पर जब हनुमान जी ने सूर्यदेव को मुक्त नहीं किया तो, इंद्र ने वज्र से उनके मुख पर प्रहार किया जिससे सूर्यदेव मुक्त हुए। 
 
वहीं इस प्रहार से मारुती मूर्छित होकर आकाश से धरती की ओर गिरते हैं। पवनदेव इस घटना से क्रोधित होकर मारुती को अपने साथ ले एक गुफा में अंतर्ध्यान हो जाते हैं। जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जीवों में त्राहि-त्राहि मच उठती है। इस विनाश को रोकने के लिए सारे देवगण पवनदेव से आग्रह करते हैं कि वे अपने क्रोध को त्याग पृथ्वी पर प्राणवायु का प्रवाह करें। सभी देव मारुती को वरदान स्वरूप कई दिव्य शक्तियाँ प्रदान करते हैं और उन्हें हनुमान नाम से पूजनीय होने का वरदान देते हैं। उस दिन से मारुती का नाम हनुमान पड़ा।