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जन्माष्टमी 2020 : भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े रोचक 10 रहस्य

Updated: सोमवार, 10 अगस्त 2020 (07:51 IST)
इस बार जन्माष्टमी 12 अगस्त 2020 को संपूर्ण विश्‍व में मनाई जाएगी। दुर्गा, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, राम और कृष्ण यह छह हिन्दू धर्म के आधार स्तंभ है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म युग के मान से द्वापर के अंत में हुआ था, जबकि ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार उनका जन्म 3112 ईसा पूर्व हुआ था। आओ जानते हैं इस संबंध में रोचक 10 रहस्य।
 
 
1. भविष्यवाणी के अनुसार भगवान विष्णु को श्री कृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ से उनके आठवें पुत्र के रूप में जन्म लेना था तो ऐसा ही हुआ।
 
2. उस समय पौराणिक कालमान से विष्णु ने अपने 8वें अवतार के रूप में 8वें मनु वैवस्वत के मन्वंतर के 28वें द्वापर में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के 7 मुहूर्त निकल गए और 8वां उपस्थित हुआ तभी आधी रात के समय सबसे शुभ लग्न उपस्थित हुआ। उस लग्न पर केवल शुभ ग्रहों की दृष्टि थी। रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि के संयोग से जयंती नामक योग में लगभग 12 बजे अर्थात शून्य काल में जन्म लिया था।
 
3. शोधकर्ताओं ने खगोलीय घटनाओं, पुरातात्विक तथ्यों आदि के आधार पर कृष्ण जन्म और महाभारत युद्ध के समय का सटीक वर्णन किया है। उनके अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म लगभग 3112 ईसा पूर्व हुआ था। आर्यभट्‍ट के अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ईपू में हुआ। इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात भगवान कृष्ण ने देह छोड़ दी थी तभी से कलियुग का आरंभ माना जाता है। उनकी मृत्यु एक बहेलिए का तीर लगने से हुई थी। तब उनकी उम्र लगभग 108 थी। हालांकि कुछ विद्वान 119 बताते हैं। 
 
4. जब भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्म हुआ तब भारी बारिश हो रही थी और यमुना नदी में उफान था। उनके माता और पिता को उनकी मृत्यु का डर था। अंधेरा भी भयंकर था, क्योंकि उस वक्त बिजली नहीं होती थी। 
 
5. जब कृष्ण का जन्म हुआ तो जेल के सभी संतरी माया द्वारा गहरी नींद में सो गए। उस बारिश में ही वसुदेव ने नन्हे कृष्ण को एक सूपड़े में रखा और उसको लेकर वे जेल से बाहर निकल आए और किसी चमत्कार से यमुना पार करने के बाद कृष्ण को यशोदा के पालने में छोड़ आए और वहां से उस वक्त जन्मी उनकी बालिका को उठा लाए और पुन: जेल के दरवाजे स्वत: ही बंद हो गए। 
 
6. दुनिया में ऐसे कई बालक हैं जिन्हें उनकी मां ने नहीं दूसरी मां ने पाल-पोसकर बड़ा किया। दुनिया में योगमाया की तरह ऐसी भी कई बालिकाएं हैं जिन्होंने किसी महान उद्देश्य के लिए खुद का बलिदान कर दिया और फिर वे जीवनभर कृष्‍ण जैसे भाई का साथ देती रहीं।
 
7. जब कंस को पता चला कि छलपूर्वक वसुदेव और देवकी ने अपने पुत्र को कहीं ओर भेज दिया है तो उसने तुरंत चारों दिशाओं में अपने अनुचरों को भेज दिया और कह दिया कि अमुक-अमुक समय पर जितने भी बालकों का जन्म हुआ हो उनका वध कर दिया जाए।
 
8. कहते हैं कि श्रीकृष्ण के जन्म के समय छह ग्रह उच्च के थे। उनकी कुण्‍डली में लग्न में वृषभ राशि थी जिसमें चंद्र ग्रह था। चौथे भाव में सिंह राशि थी जिसमें सूर्य विराजमान थे। पांचवें भाव में कन्या राशि में बुध विराजमान थे। छठे भाव की तुला राशि में शनि और शुक्र ग्रह थे। नौवें अर्थात भाग्य स्थान पर मकर राशि थी जिसमें मंगल ग्रह उच्च के होकर विराजमान थे। 11वें भाव में मीन राशि के गुरु उच्च के होकर विराजमान थे।
 
हालांकि कई विद्वान उनकी कुण्‍डली के ग्रहों की स्थिति को इससे अलग भी बताते हैं। कुछ के अनुसार केतु लग्न में था तो कुछ के अनुसार छठे भाव में। श्रीकृष्‍ण की जन्‍म कुण्‍डली को लेकर कई भेद हैं, लेकिन यह गणितीय स्थिति अब तक सर्वार्थ शुद्ध उपलब्‍ध है। इसके कई प्रमाण हमें मिलते हैं। श्रीमद्भागवत की अन्वितार्थ प्रकाशिका टीका में दशम स्‍कन्‍ध के तृतीय अध्‍याय की व्‍याख्‍या में पंडित गंगासहाय ने ख्‍माणिक्‍य ज्‍योतिष ग्रंथ के आधार पर लिखा है कि…
 
''उच्‍चास्‍था: शशिभौमचान्द्रिशनयो लग्‍नं वृषो लाभगो जीव: सिंहतुलालिषुक्रमवशात्‍पूषोशनोराहव:।'
नैशीथ: समयोष्‍टमी बुधदिनं ब्रह्मर्क्षमत्र क्षणे श्रीकृष्‍णाभिधमम्‍बुजेक्षणमभूदावि: परं ब्रह्म तत्।।''
 
9. ब्रिटेन में कार्यरत न्यूक्लियर मेडिसिन के फिजिशियन डॉ. मनीष पंडित ने महाभारत में वर्णित 150 खगोलीय घटनाओं के संदर्भ में कहा कि महाभारत का युद्ध 22 नवंबर 3067 ईसा पूर्व को हुआ था। उस वक्त भगवान कृष्ण 55-56 वर्ष के थे। उन्होंने अपनी खोज के लिए टेनेसी के मेम्फिन यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के प्रोफेसर डॉ. नरहरि अचर द्वारा 2004-05 में किए गए शोध का हवाला भी दिया। इस मान से तो उनकी उम्र 91-92 की ही होना चाहिए।
 
10. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था और सूर्य सिंह राशि में था। 

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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