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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2022 पर प्लान कर सकते हैं श्री कृष्ण से जुड़ी इन 7 जगहों पर जाने का

Updated: मंगलवार, 16 अगस्त 2022 (07:57 IST)
krishna janmashtami : अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 19 अगस्त 2022 शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग भेद से कुछ लोग 18 अगस्त को भी मनाएंगे। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के 8वें मुहूर्त में हुआ था। उस दौरान आधी रात थी। इस बार आप जन्माष्टमी कृष्ण से जुड़ी इन 7 जगहों मना सकते हैं।
 
1. मथुरा जन्मभूमि का मंदिर : श्रीकृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश की प्राचीन नगरी मथुरा के कारागार में हुआ था। उस स्थान पर वर्तमान में एक हिस्से पर मंदिर और दूसरे पर मस्जिद बनी हुई है। सबसे पहले ईस्वी सन् 1017-18 में महमूद गजनवी ने मथुरा के समस्त मंदिर तुड़वा दिए थे। तभी से यह भूमि भी विवादित हो चली है। यहां पर जन्माष्टमी पर लाखों लोगों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
 
2. वृंदावन का मंदिर : मथुरा के पास वृंदावन में रमण रेती पर बांके बिहारी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यह भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहीं पर प्रेम मंदिर भी मौजूद है और यहीं पर प्रसिद्ध स्कॉन मंदिर भी है जिसे 1975 में बनाया गया था। यहां विदेशी श्रद्धालुओं की भी अच्छी-खासी तादाद है जो कि हिन्दू हैं। इसी बृज क्षेत्र में गोवर्धन पर्वत भी है जहां श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक मंदिर है। यहां पर जन्माष्टमी की धूम देखते ही बनती है
 
3. बरसाना का राधा-कृष्ण मंदिर : मथुरा के पास ही बरसान है। बरसाना के बीचोबीच एक पहाड़ी है। उसी के ऊपर राधा रानी मंदिर है। राधा-कृष्ण को समर्पित इस भव्य और सुन्दर मंदिर का निर्माण राजा वीर सिंह ने 1675 में करवाया था। दरअसल, राधा रानी बरसाने की ही रहने वाली थी। यहां पर भी लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
 
ब्रजमंडल में उपरोक्त तीन स्थलों के अलावा आप चहें तो गोकुल और गोवर्धन भी जा सकते हैं। दोनों ही क्षेत्र मथुरा के पास ही है। कुल मथुरा से 15 किलोमीटर दूर है। गोवर्धन भी तकरीबन 25 किलोमीटर दूर है।
 
4. द्वारिका का मंदिर : मथुरा को छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण गुजरात के समुद्री तट स्थित नगर कुशस्थली चले गए थे। वहां पर उन्होंने द्वारिका नामक एक भव्य नगर बसाया। यहां भगवान श्रीकृष्ण को श्री द्वारकाधीश कहा जाता है। वर्तमान में द्वारिका 2 हैं- गोमती द्वारिका, बेट द्वारिका। गोमती द्वारिका धाम है, बेट द्वारिका पुरी है। बेट द्वारिका के लिए समुद्र मार्ग से जाना पड़ता है। द्वारकाधीश मंदिर के अलावा आप गुजरात के दाकोर में स्थित रणछोड़राय मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं। हालांकि गुजरात में श्रीकृष्ण के और भी मंदिर है।
5. भालका तीर्थ : गुजरात स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पास प्रभास नामक एक क्षेत्र है जहां पर यदुवंशियों ने आपस में लड़कर अपने कुल का अंत कर लिया था। वहीं एक स्थान पर एक वृक्ष ने नीचे भगवान श्रीकृष्ण लेटे हुए थे तभी एक बहेलिए ने अनजाने में उनके पैरों पर तीर मार दिया जिसे बहाना बनाकर श्रीकृष्ण ने अपनी देह छोड़ दी। यह विशिष्ट स्थल या देहोत्सर्ग तीर्थ नगर के पूर्व में हिरण्या, सरस्वती तथा कपिला के संगम पर बताया जाता है। इसे प्राची त्रिवेणी भी कहते हैं। इसे भालका तीर्थ भी कहते हैं।
 
6. श्रीनाथजी का मंदिर : राजस्थान के नाथद्वारा में श्रीनाथजी का मंदिर। यहां भगवान श्रीकृष्ण को श्रीनाथ कहते हैं। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय के वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ स्थानों में सर्वोपरि माना जाता है। नाथद्वारा धान उदयपुर से लगभग 48 किलोमीटर दूर राजसमंद जिले में बनास नदी के तट पर स्थित हैं। जब क्रूर मुगल शासक औरंगजेब ने गोकुल का मंदिर तोड़ने का आदेश दिया तब  वल्लभ गोस्वामी यहां की मूर्ति लेकर नाथद्वारा में आ गए और यहां उस मूर्ति की पुन: स्थापना की। ये मंदिर 12वीं शताब्दी में  बनाया गया था  
 
7. जगन्नाथ मंदिर : उड़ीसा राज्य में पुरी का जगन्नाथ धाम चार धाम में से एक है। मूलत: यह मंदिर विष्णु के रूप पुरुषोत्तम नीलमाधव को समर्पित है। कहते हैं कि द्वापर के बाद भगवान कृष्ण पुरी में निवास करने लगे और बन गए जग के नाथ अर्थात जगन्नाथ। यहां भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं।
 
मायापुर : इस्कॉन या इंटरनैशनल सोसायटी ऑफ कृष्णा कॉन्शियसनैस का मुख्यालय मायापुर में है। 380 फीट ऊंचे मंदिर में दुनियाभर के देशी और विदेशी कृष्ण भक्त एकत्रित होंगे और इस बार वहां पर जन्माष्टमी की बहुत बड़ी धूम रहेगी। यह स्थान पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के मायापुर में स्थित है।

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