sundarkand

शरद पूर्णिमा : सुकोमल छवि वाले संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के जन्मदिवस पर विशेष

Updated: शनिवार, 12 अक्टूबर 2019 (13:06 IST)
जैन धर्म के तपस्वी, अहिंसा, करुणा, दया के प्रणेता और प्रखर कवि सं‍त शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज का जन्मदिवस आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) के दिन मनाया जाता है। 
 
ऐसे महापुरुष मानव जाति के प्रकाश पुंज हैं, जो मनुष्‍य को धर्म की प्रेरणा देकर उनके जीवन के अंधेरे को दूर करके उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाने का महान कार्य करते हैं। वास्तव में ये महान आत्माएं ही मानवता के जीवन-मूल्यों की प्रतीक हैं। ऐसे गुरु के आशीष पर लोगों का प्रगाढ़ विश्वास है। पृथ्वी पर आज हर मानव शांति और सुख की चाहत में व्याकुल है और तनावरहित जीवन जीना चाहता है। 

 
मुनि विद्यासागरजी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को बेलगांव जिले के गांव चिक्कोड़ी में शरद पूर्णिमा के दिन हुआ। उनका नाम विद्याधर रखा गया। उनका घर का नाम पीलू था। माता आर्यिकाश्री समयमतिजी और पिता मुनिश्री मल्लिसागरजी दोनों ही बहुत धार्मिक थे। 
 
मुनिश्री ने कक्षा नौवीं तक कन्नड़ भाषा में शिक्षा ग्रहण की और 9 वर्ष की उम्र में ही उनका मन धर्म की ओर आकर्षित हो गया और उन्होंने उसी समय आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प कर लिया। उन दिनों विद्यासागरजी आचार्यश्री शांतिसागरजी महाराज के प्रवचन सुनते रहते थे। इसी प्रकार धर्म ज्ञान की प्राप्ति करके, धर्म के रास्ते पर अपने चरण बढ़ाते हुए मुनिश्री ने मात्र 22 वर्ष की उम्र में अजमेर (राजस्थान) में 30 जून 1968 को आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज के शिष्यत्व में मुनि दीक्षा ग्रहण की।
 
 
दिगंबर मुनि संत विद्यासागरजी ने और भी कई भाषाओं पर अपनी कमांड जमा रखी थी। उन्होंने कन्नड़ भाषा में शिक्षण ग्रहण करने के बाद भी अंग्रेजी, हिन्दी, संस्कृत, कन्नड़ और बंगला भाषाओं का ज्ञान अर्जित करके उन्हीं भाषाओं में लेखन कार्य किया। 
 
महाराजजी की प्रेरणा और आशीर्वाद से आज कई गौशालाएं, स्वाध्याय शालाएं, औषधालय स्थापित किए गए हैं। कई जगहों पर निर्माण कार्य जारी है। आचार्यश्री पशु मांस निर्यात के विरोध में जनजागरण अभियान भी चला रहे हैं, साथ ही 'सर्वोदय तीर्थ' के नाम से अमरकंटक में एक विकलांग नि:शुल्क सहायता केंद्र चल रहा है। विद्यासागरजी का 'मूकमाटी' महाकाव्य सर्वाधिक चर्चित है।
 
 
महाराजश्री ने पशुधन बचाने, गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने, मांस निर्यात बंद करने को लेकर अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आचार्यश्री विद्यासागरजी मन से जल की तरह निर्मल तथा प्रसन्न और हमेशा मुस्कराते रहते हैं। वे अपनी तपस्या की अग्नि में कर्मों की निर्जरा के लिए तत्पर रहते हैं। 
 
सन्मार्ग प्रदर्शक, धर्म प्रभावक आचार्यश्री में अपने शिष्यों का संवर्द्धन करने का अभूतपूर्व सामर्थ्य है। आपके चुम्बकीय व्यक्तित्व ने युवक-युवतियों में अध्यात्म की ज्योत जगा दी है। आचार्यश्री विद्यासागरजी दिगंबर सरोवर के राजहंस हैं। ऐसे ज्ञानी और सुकोमल छवि वाले आचार्यश्री विद्यासागरजी को उनके जन्मदिवस पर शत-शत नमन्! 

ALSO READ: sharad purnima : राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का जन्मदिवस
 
लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
श्रीमती राजश्री कासलीवाल पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव। धर्म, व्रत-त्योहार, ज्योतिष, रेसिपी, साहित्य, लाइफ स्टाइल और अन्य विषयों पर लेखन का कार्य। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब-एडिटर (कंटेंट) के पद पर कार्यरत हैं।  .... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

कब है संतान सप्तमी, कैसे करते हैं व्रत और पूजा का क्या है शुभ मुहूर्त

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 04 सितंबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

Krishna Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र, आरती और अचूक उपाय

कब है ऋषि पंचमी? जानें अपामार्ग स्नान का महत्व, व्रत के नियम और सप्तऋषि पूजन परंपरा

नीम करोली बाबा ने जब खाली LSD की गोलियां, रिचर्ड अल्बर्ट क्यों बुरी तरह घबरा गए?

अगला लेख