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महामारी : 1400 साल पहले हजरत मुहम्मद साहब ने क्या दी थी हिदायत, जानिए

सोमवार,अप्रैल 6, 2020
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हजरत मोहम्मद साहब को अल्लाह ने एक अवतार के रूप में पृथ्वी पर भेजा था, क्योंकि उस समय अरब के लोगों के हालात बहुत खराब हो गए थे।
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पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्ल. को बचपन में ही देखकर लोग कहते, यह बच्चा एक महान आदमी बनेगा
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पैगम्बरे- इस्लाम हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक और सौहार्द के संदेशवाहक थे। इं
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हजरत मोहम्मद साहब का जन्म मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था। उनके वालिद साहब का नाम अबदुल्ला बिन अब्दुल मुतलिब था और वालेदा का नाम आमेना था।
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ईद-ए-मिलादुन्नबी : पैगम्बर साहब हजरत मुहम्मद सल्ल. का जन्म मक्का शहर में 571 ईसवी को हुआ था। इसी की याद में ईद मिलादुन्नबी का पर्व मनाया जाता है।
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10 सितंबर 2019, मंगलवार को मोहर्रम (मुहर्रम) मनाया जा रहा है।इसके लिए जगह-जगह खूबसूरत ताजिए बनकर तैयार हैं। लेकिन क्या आप इसका इतिहास जानते हैं कि कब से शुरू हुई ताजिए की परंपरा, आइए जानें-
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इमाम हुसैन (रअ) दरअसल इंसानियत के तरफदार और इंसाफ के पैरोकार थे। मोहर्रम माह की दसवीं तारीख जिसे यौमे आशुरा कहा जाता है, इमाम हुसैन की (रअ) शहादत का दिवस है। य
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कर्बला कहां है, क्या है इसकी कहानी- इराक की राजधानी बगदाद से 100 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में एक छोटा-सा कस्बा है- कर्बला।
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10 सितंबर 2019, मंगलवार को मुहर्रम मनाया जा रहा है। आइए जानें इन 10 बातों से यौमे आशुरा की अहमियत
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पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है।
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पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। वर्ष 2019 में मुहर्रम का महीना 31 अगस्त से शुरू होगा और 'अशुरा' यानी मुहर्रम का मुख्य दिन 10 सितंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा।
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बकरीद या ईद उल अजहा पर कुर्बानी दी जाती है। यह एक जरिया है जिससे बंदा अल्लाह की रजा हासिल करता है। बेशक अल्लाह को कुर्बानी का गोश्त नहीं पहुंचता है
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इस्लामी साल में दो ईदों में से एक है बकरीद। ईद-उल-जुहा और ई-उल-फितर। ईद-उल-फिरत को मीठी ईद भी कहा जाता है। इसे रमजान को समाप्त करते हुए मनाया जाता है।
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पैगंबर हजरत इब्राहीम ने कुर्बानी का जो उदाहरण दुनिया के सामने रखा था, उसे आज भी परंपरागत रूप से याद किया जाता है।
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मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार कहा जाने वाला ईद-उल-फितर का पर्व न सिर्फ हमारे समाज को जोड़ने का मजबूत सूत्र है, बल्कि यह इस्लाम के प्रेम और सौहार्दभरे संदेश को भी पुरअसर ढंग से फैलाता है।
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रमजान के पाक महीने में इबादत गुजार बंदे पहली रात से ही अपने माबूद (पूज्य) को मनाने, उसकी इबादत करने मे जुट जाते हैं। इन नेक बंदों के लिए शब-ए-कद्र परवरदिगार का अनमोल तोहफा है।
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रमजान में शबे कद्र कब होगी, लेकिन 26वां रोजा और 27वीं शब को शबे कद्र होने की संभावना जताई जाती है।
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रमजान उल मुबारक का चांद 5 मई को नहीं दिखाई दिया, जिसकी वजह से रमजान का पहला रोजा 7 मई 2019, मंगलवार से रखा जाएगा।
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वह शख्स है के उसके पास कुछ माल है, मगर निसाब से कम है, मगर उसका सवाल करके माँगना नाजाइज़ है।
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