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Written By शराफत खान

आखिर सिकंदर को ही मिली जीत

शेन वॉर्न चैंपियनों के चैंपियन

आखिर सिकंदर को ही मिली जीत -
इंडियन प्रीमियर लीग का खिताब शेन शॉर्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स ने धमाकेदार अंदाज में जीत लिया। राजस्थान रॉयल्स ने जिस तरह से इस पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन किया है, उससे किसी को भी उसके चैंपियन बनने का आश्चर्य नहीं है। जो टीम सही मायनों में जीत की हकदार थी, वही चैंपियन बनी। इस जीत की हकदार पूरी टीम है और टीम को श्रेय भी जाता है, लेकिन इस सफलता का सबसे ज्यादा श्रेय कप्तान शेन वॉर्न को जाता है।

वॉर्न ने दोयम दर्जे के समझे जाने वाले ‍खिलाड़ियों में एक ऊर्जा का संचार किया और उन्हें एक यूनिट के रूप में संगठित किया।

सोहैल तनवीर को शुरू में आईपीएल के लिए अनुबंधित ही नहीं किया गया था, लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें आईपीएल के लिए अनुबंधित किया गया और तनवीर को जगह मिली सबसे सस्ती टीम राजस्थान रॉयल्स में। लेकिन इस गेंदबाज ने सबसे ज्यादा (22) विकेट लेकर खुद को साबित कर दिया। तनवीर ने खुद स्वीकार किया कि वॉर्न ने उनका सही इस्तेमाल किया और उन्हें हमेशा अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

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इसी तरह शेन वॉर्न ने मैच की परिस्थितियों के मुताबिक युसूफ पठान का बल्लेबाजी क्रम बार-बार बदला और हर बार पठान ने कमाल किया। एक अच्छे खिलाड़ी का सही इस्तेमाल एक कुशल कप्तान ही कर सकता है, वॉर्न ने वही किया।

शेन वॉर्न के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का लंबा अनुभव है, इसके अलावा उन्होंने इंग्लैंड में बहुत सा वक्त काउंटी क्रिकेट खेलकर बिताया है। क्रिकेट में हर मौके के उतार-चढ़ाव से वाकिफ वॉर्न ने फाइनल में टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण का फैसला किया। सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में लक्ष्य का पीछा करना हमेशा ही मूश्किल होता है, लेकिन वॉर्न को अपनी टीम की शक्ति का अंदाजा था।

वॉर्न ने फाइनल से पहले टीम के साथ बैठकर होमवर्क किया, क्योंकि वॉर्न खुद एक महान गेंदबाज हैं, इसलिए अपने गेंदबाजों को उन्होंने गेंदबाजी के ‍दिशा-निर्देश दिए। यूसुफ पठान को फाइनल मुकाबले में गेंद थमाना एक प्रयोग मात्र नहीं था बल्कि यह वॉर्न की रणनीति का हिस्सा था। वॉर्न ने अपनी टीम के एक-एक खिलाड़ी को व्यक्तिगत रूप से प्रोत्साहित किया। जब खिलाड़ी को कप्तान का सर्मथन हो तो उसमें अपना सौ प्रतिशत योगदान देने का जज्बा पैदा होता है और यही राजस्थान रॉयल्स की सफलता का राज है।

वॉर्न की कप्तानी की विशेषता यह भी रही कि उन्होंने अपने खिलाड़ियों को इस बड़े मैच का दबाव महसूस नहीं होने दिया। स्वपनिल असनोदकर, यूसुफ पठान, शेन वॉटसन अपनी बल्लेबाजी के दौरान सहज थे। मैच के आखिरी क्षणों में वॉर्न ने सोहैल तनवीर के साथ मिलकर खतरे में पड़ी जीत को सुनिश्चित किया। पहले आईपीएल टूर्नामेंट के अनुभव यादगार हैं।