IPL-13 : अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ सकता

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कल रात इस मुहावरे को वास्तविकता का जामा पहनते देखा कि 'अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ सकता'। किंग्स के ने अकेले किला लड़ाने के बहुतेरे प्रयास किए लेकिन सनराइजर्स को ग्रहण लगाने में नाकाम ही रहे। 202 के लक्ष्य प्राप्ति के लिए यह वाम हस्त बल्लेबाज गेंदबाजों को सीधा करने में अकेला ही लगा रहा जबकि दूसरे छोर से उसके साथी नियमित रूप से अपने विकेट फेंकते रहे।
ऑरेंज कैप के प्रबल दावेदार केएल राहुल तथा मयंक अग्रवाल स्कोरबोर्ड को अधिक क्षति पहुंचाए बगैर ही चलते बने। मयंक के रन आउट का श्रेय वॉर्नर को तो जाता ही है लेकिन इसमें राहुल के गलत कॉल का उतना ही योगदान रहा।

निकोलस इस अंदाज में मैदान में उतरे मानों डग आउट में ही बल्लेबाजी का अभ्यास कर रहे थे। अभिषेक शर्मा को आते ही 2 छक्के उड़ाए और फिर अब्दुल समद के ओवर में 4 छक्के तथा 2 चौकों की मदद से 28 रन लूटकर स्कोर गति को आसमान दिखा दिया, जिसमें 105 तथा 100 मीटर के लंबे प्रहार भी शामिल थे।

मैक्सवेल खुद के कॉल पर ही रन आउट हो गए। इसका सारा श्रेय प्रियम गर्ग के अचूक निशाने को जाता है। जहां से उन्होंने थ्रो किया वहां से केवल एक स्टंप ही नजर आ रहा था। इसके बाद कहर ढाया राशिद खान ने। उनकी लाजवाब गुगली मनदीप सिंह के स्टंप ले उड़ी। तांडव मचा रहे निकोलस को जहां राशिद ने नटराजन के हाथों कैच करवाया, वहीं अगली गेंद पर शमी को पगबाधा कर 'डबल विकेट मैडन' ओवर डालकर संघर्ष शब्दों को विराम दे दिया।
पहली तीन गेंदे डॉट फेंककर राशिद ने निकोलस को आउट होने पर मजबूर कर दिया। पूरन ने न केवल मात्र 17 गेंदों में रिकॉर्ड अर्धशतक जमाया बल्कि 77 रनों की अपनी आतिशी पारी में केवल 37 गेंदों का इस्तेमाल कर 7 गगनभेदी छक्के तथा 5 चौके भी उड़ाए। उनके अलावा केवल दो बल्लेबाज डबल फिगर (11-11) मे पहुंच पाए।
राशिद खान ने 4 ओवर में मात्र 12 रन दिए और तीन बल्लेबाजों की बलि ले ली। सारे खटराग का कारण केवल एक ही था दबाव। बेरियस्टो 97 (55 गेंद 7 चौके, 6 छक्के) और वॉर्नर 50 (37) गेंद के बीच पहले विकेट के लिए 160 रनों की लाजवाब साझेदारी। स्कोर 230 तक भी जा सकता था लेकिन गेंदबाजों ने वापसी करते हुए इन दोनों के अलावा अब्दुल समद, मनीष पांडे, प्रियम गर्ग तथा अभिषेक शर्मा को सस्ते में चलता कर दिया।
विलियम्सन ने संक्षिप्त पारी में स्कोर 201 तक पहुंचा दिया। बगैर किसी नुकसान के 160 से 6 विकेट पर 201 तक का सफर रोमांचक रहा। युवा बिश्नोई ने जरूर प्रभावित किया। छक्के खाने के बावजूद बंदा फ्लाइट करने से नहीं चूका और महत्वपूर्ण विकेट भी हासिल किए।

इस कथा का सार केवल इतना ही है कि वाकई अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ सकता। निकोलस अवश्य कह सकते हैं कि 'मैं तो अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर, साथी घटते रहे और कारवां लुटता गया...'



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