Hanuman Chalisa

सावधान! धरती की तरफ 55000 किमी प्रति घंटे की गति से बढ़ रहा कई परमाणु बमों से भी बड़ा खतरा

Updated: शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020 (14:45 IST)
वॉशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने नासा ने दावा किया कि एक विशालकाय ऐस्ट्रॉयड तेजी से धरती की ओर बढ़ रह है। बुर्ज खलीफा के साइज का यह ऐस्ट्रॉयड पृथ्वी की तरफ 55,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। नासा के CNEOS के मुताबिक, यह बेहद खतरनाक ऐस्ट्रॉयड शनिवार को शाम 5 बजे धरती के रास्ते में आएगा।
 
नासा ने कहा कि ऐसे ऐस्ट्रॉयडों को हम पोटेंशली हजार्डस ऐस्ट्रॉयड (पीएचए) मानते हैं, यह धरती से टकरा सकते हैं या उसके पास से बेहद करीब से गुजर सकते हैं।' इस ऐस्ट्रॉयड का आकार दुबई की बुर्ज खलीफा जितना बड़ा है और यह हमारी पृथ्वी के 57 लाख किलोमीटर दूर से गुजरेगा।
 
नासा ने इस ऐस्ट्रॉयड का नाम 2002-PZ39 रखा है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर यह धरती से टकराता है तो कई परमाणु बमों जितनी तबाही मचा सकता है।
 
PZ39 एक अपोलो ऐस्ट्रॉयड है, यह सूर्य के चारों ओर घूमने के दौरान कई बार हमारे ग्रह के मार्ग को काटता है।

Show comments

TVS iQube MillionR Edition लॉन्च, 145 किमी रेंज और Type-C चार्जिंग समेत मिलेंगे ये फीचर्स, हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा, कीमत जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान

नेपाल में बाढ़ से तबाही तो दिल्ली में H1N1 का कहर, मामलों की संख्या 3000 के करीब

कांवड़ यात्रा पर दिग्विजय सिंह के बयान से गरमाई सियासत, भाजपा ने बताया सनातन का अपमान, माफी की मांग

चीनी कैमरे ने रिकॉर्ड की Nepal की तबाही का भयावह दृश्‍य, जिस जगह टूटा था ग्लेशियर, वहां पहुंचा चीनी हेलीकॉप्टर

तिब्बत में टूटा ग्लेशियर का 'थूथन', नेपाल में हाहाकार, 30 फीट ऊंची प्रलयंकारी बाढ़ का खौफनाक सच

सभी देखें

नेपाल त्रासदी की एक तस्‍वीर यह भी, पहले शवों की ज्‍वेलरी नोची, अब 92 लाख का लॉकर लूटा, लालचियों से निपट रही पुलिस

नॉर्वे के राजा हाराल्ड पंचम का निधन, 1991 में बने थे राजा

लोगों को बोल्ड महिलाएं पसंद नहीं, हां, मैंने शराब पी थी, कोई रिग्रेट नहीं, नोएडा में गार्ड्स को गालियां देने वाली महिला का बयान

ओरछा में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक मेंं युवा वोटर्स को पार्टी से जोड़ने और मिशन 2028 की बनेगी रणनीति

नेपाल की ग्लेशियर बाढ़ ने बजाई कश्मीर के लिए खतरे की घंटी, बढ़ती ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं तबाही की वजह

अगला लेख