ट्रम्प और किम 12 जून की बैठक के लिए पहुंचे सिंगापुर

सिंगापुर| पुनः संशोधित रविवार, 10 जून 2018 (23:07 IST)
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सिंगापुर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरिया नेता उन के बीच

12 जून को होने वाले चिर प्रतिक्षित ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के लिए दोनों नेता रविवार को पहुंच गए। ट्रम्प एयर फोर्स वन विमान से सिंगापुर के पाया लेबर हवाईअड्डा पहुंचे।

ट्रंप और किम मंगलवार को जब सेंटोसा द्वीप के रिसॉर्ट में मिलेंगे तो यह एक ऐतिहासिक अवसर होगा, क्योंकि 1950-53 के बीच कोरिया युद्ध के बाद से दोनों देश शत्रु बन गए। तब से उत्तर कोरिया और अमेरिका के नेता कभी नहीं मिले और न ही फोन पर बात की।

ट्रम्प किम के सिंगापुर पहुंचने के चंद घंटे के भीतर ही यहां पहुंच गए। किम देश के प्रमुख के रूप में सबसे लंबी विदेश यात्रा के बाद सिंगापुर के चांगी हवाई अड्डा पर अपने विशेष माओ सूट और हेयर स्टाइल में पहुंचे। इस शिखर वार्ता में उत्तर कोरिया के परमाणु गतिरोध को खत्म करने और परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने के भविष्य पर चर्चा होने की संभावना है।

कुछ माह पूर्व इस प्रकार की बैठक की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी क्योंकि ट्रम्प और
किम ना केवल एक दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे थे बल्कि धमका भी रहे थे जिससे क्षेत्र में युद्ध की आशंका भी व्याप्त हो गई थी। उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और अमेरिका की ओर से राजनयिक हस्तक्षेप के बाद तनाव कम हुआ तथा मार्च में ट्रम्प ने किम के बातचीत के आमंत्रण को स्वीकार करने में कोई देरी नहीं की।

बाद में ट्रम्प ने अपने रवैए में नरमी लाते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के साथ वार्ता शुरु करना किम के साथ एक रिश्ते की शुरुआत होगी और इसके लिए एक से अधिक शिखर सम्मेलन करने होंगे। इसमें उत्तर कोरिया के तेजी से परमाणु मुक्त करने की असली मांग से पीछे हटने का भी संकेत शामिल था। किम ने अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की इच्छा के बारे में बहुत कम संकेत दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वह अपने परिवार के राजवंशीय शासन के अस्तित्व के लिए इसे महत्वपूर्ण मानते हैं। ट्रम्प और उनके सहयोगियों का कहना है कि सबसे कठिन आर्थिक प्रतिबंधों, राजनयिक कार्रवाई और सैन्य खतरों के अमेरिकी नेतृत्व वाले 'अधिकतम दबाव' वाले अभियान ने किम को वार्ता की मेज पर बुलाया। ट्रंप ने कनाडा में शनिवार को संवाददाताओं से कहा था कि किम के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन में किया गया कोई भी समझौता 'सहज' निर्णय होगा। उन्होंने कहा, मेरा लक्ष्य स्पष्ट है लेकिन यह कहना होगा कि जो कुछ भी होगा तत्कालिक सहज निर्णय के आधार पर होगा। आज तक पहले कभी इस स्तर पर ऐसा कुछ नहीं किया गया। (वार्ता)



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