मुझे कुत्ता कह दो, पाकिस्तानी मत कहो...

Last Updated: शनिवार, 20 अगस्त 2016 (16:55 IST)
के लोगों में के प्रति कितनी घृणा है, इसका प्रमाण एक बलूच युवा से मिला। मजदक नामक इस युवा ने पर दस्तावेजों की जांच के समय इमिग्रेशन अधिकारियों से कहा कि मुझे कुत्ता कह लीजिए, लेकिन मुझे खुद को पाकिस्तानी कहलवाना मंजूर नहीं है। 
बलूचिस्तान से आए रिफ्यूजी मजदक दिलशाद बलूच को दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अथॉरिटीज के साथ घंटों बिताने पड़े थे। इकोनॉमिक्स टाइम्स को दिए साक्षात्कार में 25 साल के मजदक ने बताया कि जब कुछ महीनों पहले वे दिल्ली आए तो इमिग्रेशन अधिकारियों को उन पर शक हुआ। दरअसल, मजदक के पास से कनाडाई पासपोर्ट था, जिसमें उनका जन्मस्थान क्वेटा (पाकिस्तान) लिखा हुआ था।
 
मजदक ने कहा कि मुझे यह बात साबित करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी कि मैं पाकिस्तानी नहीं हूं। मैंने अधिकारियों से कहा कि मुझे कुत्ता कह लो, लेकिन पाकिस्तानी मत कहो। उन्होंने कहा कि मेरा जन्म स्थान बलूचिस्तान होने के कारण वैसे भी मुझे काफी परेशानी झेलनी पड़ी है।
 
मजदक ने बताया कि मेरे पिता मीर गुलाम मुस्तफा रैसानी एक फिल्म मेकर थे, जिनका पाक सेना अपहरण कर लिया। मां का भी शोषण किया गया। हमारी प्रॉपर्टी तबाह हो गई। मेरे पिता को 2006-08 के बीच पाक सेना ने अपनी कैद में रखा। लंबी कोशिशों के बाद हमारी रिहाई हुई और हम कनाडा चले गए। 
 
पाकिस्तान के अत्याचारों को उजागर करते हुए मजदक ने कहा कि पाकिस्तानी आर्मी हमेशा बलूचों के पीछे पड़ी रहती है। हमें देश के तौर पर पाकिस्तान को अपनाने के लिए दबाव बनाया जाता है और मना करने पर मौत के घाट उतार दिया जाता है।



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