सैन्य कार्रवाई की अनुमति नहीं-पाक

राष्ट्रीय असेंबली में सांसदों ने जताई चिंता

इस्लामाबाद (वार्ता)| वार्ता| पुनः संशोधित गुरुवार, 25 दिसंबर 2008 (17:16 IST)
ने को पाकिस्तानी सरजमीं पर आतंकवादी ठिकाने खत्म करने के लिए सिर्फ एक बार कार्रवाई करने की अनुमति देने संबंधी मीडिया रिपोर्टो का खंडन किया है।

पाकिस्तानी संसद 'राष्ट्रीय असेंबली' में मुंबई हमलों के बाद भारत के साथ जारी तनाव के मद्देनजर बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे पर चर्चा को समाप्त करते हुए सदन के नेता मियाँ रजा रब्बानी ने उन खबरों को निराधार बताया, जिनमें कहा जा रहा है कि अमेरिकी चीफ ऑफ स्टाफ माइकल मुलेन ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि उसकी सरजमीं पर भारत की ओर से कार्रवाई का उसे प्रतिरोध नहीं करना चाहिए तथा पाकिस्तान एक कार्रवाई की अनुमति देने पर सहमत हो गया है।

रब्बानी ने कहा मुलेन ने न तो हमें इस तरह की सलाह दी है और न ही ऐसी किसी सलाह मानने को हम तैयार हैं। उन्होंने कहा पाकिस्तान किसी तरह की कार्रवाई तथा अपनी हवाई या अन्य किसी सीमा का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं देगा।

उन्होंने कहा देश की सीमा का उल्लंघन कर किसी किस्म की कार्रवाई को माना जाएगा और उसका पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने कहा पाकिस्तान शांतिपूर्ण देश है, लेकिन उस पर युद्ध थोपा गया तो वह माकूल जवाब देने के लिए तैयार है। रब्बानी ने मुंबई हमले की जाँच में सहयोग की पेशकश की और कहा कि यदि भारत उसके किसी नागरिक के खिलाफ सबूत देगा वह कार्रवाई करेगा, लेकिन किसी भी व्यक्ति को भारत को सौंपा नहीं जाएगा।

इससे पहले सांसदों ने इन रिपोर्टों पर चिंता जताई कि एडमिरल मुलेन ने एक गुप्त योजना के तहत पाकिस्तान सरकार से कहा है कि वह देश के भीतर भारत को कार्रवाई करने का एक मौका दे दे और किसी तरह से इसका प्रतिरोध न करे। सांसदों ने सरकार से किसी तरह के दबाव के आगे न झुकने तथा जनता से मिले समर्थन से प्रेरणा लेकर भारत की ओर से युद्ध का माहौल बनाए जाने का जवाब देने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाने की भी अपील की।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के सांसद निसार मेमन ने कहा कि सरकार को भारत के साथ सभी तरह के आर्थिक व्यापार बंद कर उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाना चाहिए। भारत को पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान निर्यात करने की भी अनुमति नहीं दी जाना चाहिए।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के इशाक डार ने कहा कि सरकार को अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए। उसे भारत को राजनयिक मोर्चे पर जवाब देना चाहिए। भारतीय मीडिया के गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है।
उन्होंने कहा भारत के विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी और अन्य अधिकारी मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकवादी अजमल कसाब को पाकिस्तानी नागरिक बता रहे हैं, लेकिन इसी हमले में मारे गए नौ अन्य आतंकवादियों की पहचान वे लोग नहीं कर सके हैं। सांसद एसएम जफर ने कहा भारत और पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है।

उलेमाई इस्लाम (एफ) के डॉ. खालिद सूमरो ने उन रिपोर्टों की जाँच करने की माँग की है, जिनमें कहा गया है कि सरकार ने चीन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जमात उद दावा पर प्रतिबंध लगाने सम्बन्धी प्रस्ताव पर वीटो न करने का आग्रह किया था।
उन्होंने मुस्लिम देशों की बैठक बुलाने की भी सलाह दी। उन्होंने रक्षामंत्री द्वारा यह घोषणा किए जाने की आलोचना की कि पाकिस्तान युद्ध की स्थिति में परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा।

विपक्ष के नेता कमील अली आगा ने भारत के दुष्प्रचार का जवाब देने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने को कहा। रेहाना याहया बलूच ने आरोप लगाया कि भारत बलूचिस्तान में आतंकवादी कार्रवाइयों में लिप्त है और इसका प्रमुखता से प्रचार किया जाना चाहिए।
कौसर परवीन ने सलाह दी कि मौजूदा स्थिति पर विचार करने के लिए इस्लामी देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कांफ्रेंस देशों का सम्मेलन किसी अन्य देश में आयोजित किया जाना चाहिए।



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