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जादू दिखाती हैं रेल पटरियां...

Updated: शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015 (16:44 IST)
हजारीबाग। इसे विज्ञान कहें या चमत्कार, लेकिन हजारीबाग-बरकाकाना रूट पर बसे लोहरियाटांड में सुबह 8 बजते ही रेल की पटरियां एक-दूसरी से सटने लगती हैं। करीब तीन घंटे में ये पटरियां एक दूसरी से पूरी तरह सट जाती हैं, लेकिन इससे भी चौंकाने वाली बात तब होती है जब दोपहर के 3 बजते ही ये पटरियां अपने आप दूर होने लगती हैं।

इन पटरियों पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू नहीं हुई है। इससे पहले इस घटना पता चलने पर इस घटना को रोकने की कोशिश भी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पटरियों के सटने की यह प्रक्रिया 15-20 फुट की लंबाई में होती है।

पटरियों की सुरक्षा करने वालों का कहना है कि उन्होंने पटरियों के चिपकने की प्रक्रिया को रोकने के लिए उनके बीच में मोटी लकड़ी फंसा दी, लेकिन खिंचाव इतना शक्तिशाली होता है कि सीमेंट के प्लेटफॉर्म में मोटे लोहे के क्लिप से कसी हुई पटरियां क्लिप और फंसी मोटी लकड़ी को तोड़कर भी एक दूसरी से चिपक जाती है। इस घटना का पता चलने पर जहां ग्रामीण इसे चमत्कार मान पूजा कर रहे हैं वहीं वैज्ञानिक इस घटना के पीछे के तथ्यों की जांच कर रहे हैं।

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