Daily Horoscope
✕

ये है दुनिया का एकमात्र तलाक मंदिर जो बन गया महिला सशक्तिकरण की मिसाल

जानिए आखिर कैसे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता रहा है ये डाइवोर्स टेंपल

Written By WD Feature Desk
Updated: बुधवार, 27 नवंबर 2024 (12:52 IST)
Divorce Temple

Divorce Temple in Japan: मंदिर हमारी धार्मिक आस्था के प्रतीक हैं। विश्व में कई अनूठे और अनोखे मंदिर हैं। हर मंदिर की अपना महत्व और खासियत होती है। कुछ मंदिर अपनी भव्यता के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ अपनी अनूठी मान्यताओं के कारण प्रसिध्द होते हैं।

आमतौर पर, मंदिरों में लोग अपनी मनोकामनाओं को लेकर भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए जाते हैं, लेकिन आज हम आपको ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसे तलाक मंदिर (Divorce Temple in Japan) के नाम से जाना जाता है। जी हां, जापान में एक ऐसा मंदिर है जो महिलाओं के बीच खासा महत्त्व रखता है। ऐसी क्या विशेषता है इस मंदिर की आइये जानते हैं।  

700 साल पहले किसने किया 'डाइवोर्स टेंपल' का निर्माण 
जापान के कामाकुरा शहर में मजूद 'डाइवोर्स टेंपल का इतिहास लगभग 700 साल पुराना है। 'तलाक मंदिर' के नाम से  प्रसिद्द इस मंदिर का निर्माण बौद्ध नन काकुसन ने अपने पति होजो टोकीमून के साथ मिलकर करवाया था।
ये वो समय था जब महिलाओं के पास अधिकार न के बराबर थे। यदि कोई महिला अपने पति से परेशां होती थी या अपनी शादी से खुश नहीं थी तब भी वह तलाक लेने के लिए स्वतंत्र नहीं थी। लेकिन पुरुष अपनी मर्जी से कभी भी पत्नी को तलाक दे सकते थे। काकुसन खुद भी एक ऐसे ही दुखद विवाह में फंसी हुई थीं। इसलिए उन्होंने एक ऐसा स्थान बनाने का फैसला किया जहां महिलाएं अपने पतियों से अलग होकर शांति से रह सकें।


Divorce Temple
 
महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है यह मंदिर
जापान का यह मंदिर महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। इसका प्रमुख कारण है कि यह मंदिर घरेलू हिंसा या अत्याचार का शिकार हुई महिलाओं के लिए एक आश्रय स्थल कहा जाता है। मान्यता है कि पुराने समय में, जब जापान के समाज में महिलाओं के अधिकार बहुत कम थे, तब इस मंदिर की स्थापना की गई थी।

ऐसी महिलाएँ जो घरेलू हिंसा या अत्याचार का शिकार होती थीं उन्हें यहां आश्रय मिलाता था। यहां उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक होने के लिए सही माहौल और सोशल सपोर्ट मिलता था। आज भी जापान का यह मंदिर महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है।

घरेलू हिंसा से बचने के लिए महिलाएं लेती थीं मंदिर में पनाह
वो समय जब जापान में महिलाओं के पास अपनी सुरक्षा के मौलिक अधिकार नहीं थे तब पुरुषों का अपनी पत्नियों को तलाक देन बहुत आम बात थी। तब इस मंदिर में घरेलू हिंसा और पति या ससुराल से पीड़ित महिलाएं आश्रय की तलाश में आती थी।

अनूठे 'डाइवोर्स टेंपल’ के दरवाजे हर उस महिला के लिए खुले थे जो अपने पति के अत्याचारों से मुक्ति चाह रही थी। मंदिर में उन्हें न केवल शारीरिक सुरक्षा मिलती थी बल्कि एक ऐसा माहौल भी मिलता था जहां वे आध्यात्मिक शांति और सांत्वना पा सकती थीं। यह मंदिर आज भी उन सभी महिलाओं के लिए सुरक्षा का प्रतीक है जो किसी भी तरह के अत्याचार का सामना कर रही हैं।
ALSO READ: शादी के बाद नई दुल्हन की ठुकराई थाली खाते हैं पति , जानिए थारू दुल्हन की पहली रसोई का अनोखा रिवाज
 
तलाकशुदा महिलाओं के लिए सहारा बना 'डाइवोर्स टेंपल’
इस मंदिर में महिलाएं अपने पतियों को तलाक देने के लिए तीन साल तक रह कर आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करती थीं। बाद में इस अवधि को घटाकर दो साल कर दिया गया। यहां महिलाएं न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होती थीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का प्रयास भी करती थी ताकि वे आर्थिक रूप से सक्षम हो सकें। कई सालों तक इस मंदिर में केवल महिलाओं को ही प्रवेश दिया जाता था। लेकिन 1902 में एक पुरुष मठाधीश की नियुक्ती के बाद यहां पुरुषों को भी प्रवेश मिलने लगा। 
अस्वीकरण (Disclaimer) : सेहत, ब्यूटी केयर, आयुर्वेद, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार जनरुचि को ध्यान में रखते हुए सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें
Show comments

ECI के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका, SIR में गड़बड़ी के आरोप, INDIA Bloc का मार्च

Economics Nobel 2026: रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड को अर्थशास्त्र का नोबेल, आर्थिक स्थिरता पर शोध के लिए मिला सम्मान

Electric Scooter : नया सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च, 250KM तक की रेंज का दावा, फीचर्स भी कमाल के

दिल्ली मेट्रो में सीट विवाद में हत्या, पूर्व IAS और वकील बेटा गिरफ्तार

शिवराज सिंह चौहान ने किसे कहा 'नरपिशाच' और क्यों मोहन यादव सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे पूर्व सीएम?

सभी देखें

SIR पर रोक लगाने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, याचिका में मिलीं 14 खामियां

केरलम, तमिलनाडु, ओडिशा समेत 6 राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त, ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के राज्यपाल

सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी के कार्यकाल को किया याद, वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा मध्यप्रदेश

Mission Shakti 6.0: मेरठ में महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए पैदल मार्च, बेटियों को दिया सशक्त बनने का संदेश

Poonch Encounter : पुंछ में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, लैंडमाइन धमाके में लश्कर के टॉप कमांडर समेत 4 आतंकी ढेर

अगला लेख