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मरने से ठीक 30 सेकंड पहले...क्या देवदूत आते हैं..?

Updated: मंगलवार, 28 मार्च 2017 (13:01 IST)
मौत एक ऐसा विषय है जिसके बारे में ज्यादातर लोग नहीं सोचते हैं। हालांकि यह अटल सत्य है कि जन्म की तरह से हमारी मौत भी सुनिश्चित है। हालांकि मौत निश्चित होती है लेकिन हममें से बहुत ज्यादा लोगों को पता नहीं होता है कि हमारी मौत से कुछ समय पहले तक कैसा लगता है? लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है कि मरने से ठीक 30 सेकंड पहले तक हमें कैसा अनुभव होता है? हमें यह बताया जाता है कि लेने के लिए देवदूत आते हैं और वे ले जाने से पहले अपने गाने गाते हैं? लेकिन सही में क्या होता है किसी को नहीं पता है।
 
इस बारे में हमें जानकारी उपलब्ध कराई ऑस्ट्रेलिया के एक डॉक्टर कैमरन शा ने जिन्होंने यह बताने के लिए मृत्यु से कुछ क्षणों पहले क्या होता है, एक प्रयोग किया। यह बताने के लिए ऑस्ट्रेलियाई न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शा ने एक मानव मस्तिष्क का विच्छेन किया। प्रयोग के लिए काम आने वाला शव एक महिला का था‍ जिसने शरीर को डीकिन यूनिवर्सिटी को अध्ययन के लिए दान में दिया था। उन्होंने मस्तिष्क का विच्छेदन किया, इसकी संरचना बताई और बताया कि कैसे मौत की प्रक्रिया पूरी होती है।
 
उन्होंने बताया कि लाखों वर्षों के दौरान मस्तिष्क में कई परतों का निर्माण हुआ है और 'बेसल गैंगलिया' इसका सबसे पुराना भाग है। यह भाग सबसे पहले विकसित हुआ था और इसी से बुनियादी इच्छाओं जैसे भूख और कामुकता पर नियंत्रण होता है। अत्यधिक बौद्धिक और भावनात्मक रूप से जटिल हिस्से हिप्पोकैम्पस और टेम्पोरल लोब विकसित हुए। चूंकि मस्तिष्क के लिए रक्त की आपूर्ति नीचे से होती है इस कारण से बाहरी परतें जो कि हमारे शरीर के मानवीय कार्यों को नियंत्रित करती हैं, पहले दस या बीस सेकंड में मरते हैं। जिन भागों से स्मरण शक्ति और संचार नियंत्रित होती है, उनका इसके बाद नंबर आता है, लेकिन इसका अंदरूनी हिस्सा जीवित‍ रहता है। 
 
जो हिस्से तकनीकी तौर पर जीवित और सक्रिय अंदरूनी भाग होता है, उसमें महत्वपूर्ण चिन्ह बने रहते हैं। डॉ. शा का कहना है कि ये हिस्से निष्क्रिय पड़े रहते हैं। सभी अर्थों और विचारों से आप इन्हें मृत कह सकते हैं क्योंकि इन हिस्सों में चेतना का अभाव होता है या ये अपने आसपास की स्थिति से सचेत नहीं होते हैं, लेकिन अगर ये बुनियादी हिस्से सक्रिय रहते हैं तो इनमें जान होती है और ये सांस लेते हैं और धड़कते हैं। मौत की प्रक्रिया की सर्वाधिक मनोरंजक व्याख्या यह है कि भविष्य में और शोध वे समझ के विकसित होने के कारण मौत पर हमारे विचारों या डर को और अधिक समझा जा सकेगा। (वाइस से साभार)

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