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वे 10 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जिनका योगदान किताबों में दर्ज नहीं है

बुधवार,अगस्त 12, 2020
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खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में त्रैलोक्यनाथ बोस के घर हुआ था।
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जब कलाम ने देश के सर्वोच्च पद यानी 11वें राष्ट्रपति की शपथ ली थी तो देश के हर वैज्ञानिक का सर फख्र से ऊंचा हो गया था। वे 'मिसाइलमैन' और 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में लोकप्रिय हुए।
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जानिए एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में कुछ और खास बातें।
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लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। आजाद
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बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरि के चिक्कन गांव में जन्‍म हुआ था। पिता गंगाधर रामचंद्र तिलक एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे।
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स्वामी विवेकानन्द अपना जीवन अपने गुरुदेव स्वामी रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर चुके थे। गुरुदेव के शरीर-त्याग के दिनों में अपने घर और कुटुंब की नाजुक हालत
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ऐसे आधुनिक भारत के निर्माण और स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी रहे दादाभाई नौरोजी का 30 जून, 1917 को उनका निधन हुआ।
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हमारे देश के ऐसे कई वीरों और वीरांगनाओं की दास्तान दबा दी गई जिन्होंने मुगल और अंग्रेजों से लड़कर विजयी प्राप्त की थी। उन्हीं में से एक थीं रानी दुर्गावती। दुर्गावती के वीरतापूर्ण चरित्र को भारतीय इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। सचमुच वह मां दुर्गा ...
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झांसी, यहां किला बनने और रानी लक्ष्मीबाई के आगमन के बाद इस किले में हर जगह नजर आने वाली उनकी छाप का सिलसिला कुछ इस तरह हैं।
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लक्ष्मीबाई का उपनाम मणिकर्णिका था, इसीलिए अपने बाल्यकाल में वे मनुबाई के नाम से जानी जाती थीं। लक्ष्मीबाई के पिता बलवंत राव के बाजीराव पेशवा की सेना में सेनानायक होने के कारण मोरोपंत
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लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तरप्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। इनके पिताजी का नाम शारदा प्रसाद और माताजी का नाम रामदुलारी देवी था।
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भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया।
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वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी एवं प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। वे विश्वभर के क्रांतिकारियों में अद्वितीय थे। वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को नासिक के भगूर गांव में हुआ। उनके पिता का नाम दामोदर पंत सावरकर था, जो गांव ...
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वे एक महान क्रांतिकारी, इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार थे। उनकी किताबें क्रांतिकारियों के लिए गीता के समान थीं।
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दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे जिन्होंने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएं लिखीं और फिर उन्हें याद किया। इस प्रकार याद की हुई 10 हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा
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सावरकर क्रांतिकारी तो थे ही, लेकिन वे कवि थे, साहित्‍यकार और लेखक भी थे। हो सकता है, क्रांतिकारी मकसद की वजह से उन्‍होंने अपने इस हिस्‍से को हाशिए पर ही रख छोड़ा हो।
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चीन का आक्रमण जवाहरलाल नेहरू के लिए एक बड़ा झटका था और शायद इसी वजह से उनकी मौत भी हुई। जवाहरलाल नेहरू की 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ा जिसमें उनकी मृत्यु हो गई।
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टेलीविजन पर पंडितजी जब पहली बार आए तब वहाi पर उपस्थित एक वृद्ध सज्जन ने उनसे पूछा, -पंडितजी, आप भी सत्तर से ऊपर हैं, मैं भी।
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भारत के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 इलाहाबाद में हुआ था। उनका जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू था, जो एक धनाढ्य परिवार के थे और माता का नाम स्वरूपरानी था.....
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