सम्बंधित जानकारी
- कैलाश विजयवर्गीय ने बुलाई बैठक, 3 ही विधायक पहुंचे, सबसे भरोसेमंद भी नहीं आया, सज्जन बोले, पितृ पर्वत जाओ यार
- इंदौर में डिलीवरी बॉय ने जहर खाकर दी जान, क्रेडिट कार्ड का कर्ज नहीं चुका पाया था, आजाद नगर में भी फांसी लगाई
- आखिर क्यों टला इंदौर के विकास पर होना वाला आयोजन, क्या मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का लेटर बम है वजह
- CNG वाहनों पर ईथेनॉल का क्या असर होगा? CNG Blending से फायदा या नुकसान?
- सुबह फोड़ा लेटर बम, दोपहर में पलटे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, कहा, मुझे नहीं पता, जिसने छापा उसी अखबार से पूछो
इंदौर-उज्जैन में ई रिक्शा पर 'हाईटेक अटैक', ऐप और ब्लूटूथ से बंद कर रहे ई-रिक्शा, अनलॉक या मदद के बदले हो रही वसूली
इंदौर/उज्जैन: मध्य प्रदेश के इंदौर और उज्जैन शहरों में ई-रिक्शा चालकों के सामने एक अजीब और बेहद परेशान करने वाली मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ शरारती और आपराधिक तत्व एक मोबाइल ऐप और ब्लूटूथ तकनीक का गलत इस्तेमाल कर सिंगल बैटरी वाले ई- रिक्शा को चलते-चलते बंद कर रहे हैं। इस 'डिजिटल खेल' की वजह से सैकड़ों गरीब ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी संकट में आ गई है।
जहां कुछ लोग इसे महज 'मस्ती' के लिए कर रहे हैं, वहीं कुछ शातिर लोग बंद रिक्शे को दोबारा चालू करने के बदले चालकों से पैसों की डिमांड कर रहे हैं। कुछ ऐसे ही मामले उज्जैन में सामने आए हैं। इसके बाद उज्जैन पुलिस ने ई रिक्शा चालकों के लिए गाइडलाइन जारी की है। परेशान चालकों ने अब इस मामले की शिकायत पुलिस से की है और 'वेबदुनिया' के सामने अपना दर्द बयां किया है।
क्या है पूरा मामला? ब्लूटूथ से थम रहे रिक्शों के पहिए : शहर में अचानक ई-रिक्शा चलते-चलते बंद होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। जांच करने पर पता चला कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है।
सिंगल बैटरी रिक्शा निशाने पर: बदमाश खासतौर पर सिंगल बैटरी वाले ई-रिक्शा को निशाना बना रहे हैं। जिन वाहनों में डबल, चार या पांच बैटरी है वे बंद नहीं हो रहे हैं। जबकि सिंगल बैटरी होने की वजह से ब्लू टूथ और ऐप से ऐसे रिक्शा बंद हो जाते हैं।
ऐप का खेल: एक विशेष मोबाइल ऐप की मदद से इन रिक्शों के ब्लूटूथ सिस्टम को हैक या डिस्कनेक्ट कर दिया जाता है, जिससे रिक्शा वहीं का वहीं ठप हो जाता है।
मस्ती और अवैध वसूली का नया धंधा : ई-रिक्शा चालकों के मुताबिक, इस हरकत के पीछे दो तरह के लोग सक्रिय हैं। कुछ युवा सिर्फ मजे लेने और चालकों को परेशान देखने के लिए ऐप से रिक्शा बंद कर देते हैं। जबकि कुछ लोग रिक्शा बंद करने के बाद बेबस चालक के पास पहुंचते हैं और उसे दोबारा चालू करने (अनलॉक करने) के एवज में पैसों की मांग करते हैं।
धंधा हुआ चौपट, चालकों ने पुलिस से लगाई गुहार : इस अजीबोगरीब परेशानी के कारण इंदौर और उज्जैन के सैकड़ों ई-रिक्शा चालकों का धंधा पूरी तरह चौपट हो गया है। सवारी बीच रास्ते में ही उतर कर चली जाती है, जिससे रोजाना की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
वेबदुनिया से चालकों ने कहा: "हम दिनभर मेहनत करके बमुश्किल दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करते हैं। अब इस नए तरह के फ्रॉड ने हमें सड़क पर ला दिया है। समझ नहीं आता कि रिक्शा अचानक क्यों बंद हो जाता है, बाद में कुछ लोग आकर पैसे मांगते हैं।"
पुलिस में शिकायत दर्ज: बढ़ते मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न को देखते हुए कुछ पीड़ित ई-रिक्शा चालकों ने एकजुट होकर पुलिस को इस बारे में जानकारी दी है, हालांकि अभी चालकों ने मांग की है कि इस ऐप का गलत इस्तेमाल करने वाले और अवैध वसूली करने वाले गिरोह पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
किस ऐप से बंद हो रहे हैं ई-रिक्शा?
ई-रिक्शा को बीच सड़क पर बंद करने के लिए जिस ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसका नाम "BAT-BMS" (या BAT BMS) है।
यह ऐप क्यों बना था : यह असल में चीन की एक कंपनी (Shenzhen Greenergy Technology) द्वारा बनाया गया ऐप है। इसका काम ई-रिक्शा में लगी लिथियम-आयन बैटरी की सेहत पर नजर रखना है (जैसे- बैटरी कितनी चार्ज है, तापमान क्या है आदि)। इसे BMS (Battery Management System) ऐप कहा जाता है।
कैसे करता है गड़बड़ी : इस ऐप में पहले कोई पासवर्ड या सुरक्षा लॉक (Pin) नहीं था। इसके चलते कोई भी व्यक्ति 10-15 मीटर के दायरे में इस ऐप को खोलकर आस-पास के ई-रिक्शा की बैटरी को ब्लूटूथ के जरिए बिना किसी परमिशन के कनेक्ट कर लेता है। ऐप के अंदर एक 'डिस्चार्ज स्विच' (पावर ऑन/ऑफ) होता है, जिसे दबाते ही बैटरी से मोटर में करंट जाना बंद हो जाता है और रिक्शा अचानक थम जाता है।
वसूली का तरीका: बदमाश जब BAT-BMS ऐप से रिक्शा बंद कर देते हैं, तो वे खुद ही ई-रिक्शा चालक के पास "मददगार" या "मैकेनिक" बनकर पहुंचते हैं। वे चालक को झांसा देते हैं कि गाड़ी चालू करने के लिए कोई विशेष ऐप डाउनलोड करना होगा या उनके पास उसे चालू करने का कोई 'सीक्रेट टूल' है।
अनलॉक का सच: असल में वे उसी BAT-BMS ऐप में जाकर सिर्फ 'ऑन' (ON) का बटन दबा देते हैं और रिक्शा तुरंत चालू हो जाता है। इस छोटे से काम के लिए वे गरीब चालकों से 200 से 300 रुपये या उससे ज्यादा की अवैध वसूली (सर्विस चार्ज के नाम पर) कर रहे हैं।
बचाव के लिए क्या करें : अब इस समस्या के सामने आने के बाद कंपनियों ने इस ऐप में पासवर्ड ऑथेंटिकेशन (Password Protection) अनिवार्य कर दिया है। ई-रिक्शा चालक अपने बैटरी डीलर या कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर पर जाकर अपनी बैटरी के ब्लूटूथ सिस्टम में पासवर्ड या पिन (PIN) सेट करवा सकते हैं, ताकि कोई अनजान व्यक्ति उनके रिक्शे को कनेक्ट न कर सके। यदि कोई ऐसी हरकत करता मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
जहां कुछ लोग इसे महज 'मस्ती' के लिए कर रहे हैं, वहीं कुछ शातिर लोग बंद रिक्शे को दोबारा चालू करने के बदले चालकों से पैसों की डिमांड कर रहे हैं। कुछ ऐसे ही मामले उज्जैन में सामने आए हैं। इसके बाद उज्जैन पुलिस ने ई रिक्शा चालकों के लिए गाइडलाइन जारी की है। परेशान चालकों ने अब इस मामले की शिकायत पुलिस से की है और 'वेबदुनिया' के सामने अपना दर्द बयां किया है।
क्या है पूरा मामला? ब्लूटूथ से थम रहे रिक्शों के पहिए : शहर में अचानक ई-रिक्शा चलते-चलते बंद होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। जांच करने पर पता चला कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है।
सिंगल बैटरी रिक्शा निशाने पर: बदमाश खासतौर पर सिंगल बैटरी वाले ई-रिक्शा को निशाना बना रहे हैं। जिन वाहनों में डबल, चार या पांच बैटरी है वे बंद नहीं हो रहे हैं। जबकि सिंगल बैटरी होने की वजह से ब्लू टूथ और ऐप से ऐसे रिक्शा बंद हो जाते हैं।
मस्ती और अवैध वसूली का नया धंधा : ई-रिक्शा चालकों के मुताबिक, इस हरकत के पीछे दो तरह के लोग सक्रिय हैं। कुछ युवा सिर्फ मजे लेने और चालकों को परेशान देखने के लिए ऐप से रिक्शा बंद कर देते हैं। जबकि कुछ लोग रिक्शा बंद करने के बाद बेबस चालक के पास पहुंचते हैं और उसे दोबारा चालू करने (अनलॉक करने) के एवज में पैसों की मांग करते हैं।
धंधा हुआ चौपट, चालकों ने पुलिस से लगाई गुहार : इस अजीबोगरीब परेशानी के कारण इंदौर और उज्जैन के सैकड़ों ई-रिक्शा चालकों का धंधा पूरी तरह चौपट हो गया है। सवारी बीच रास्ते में ही उतर कर चली जाती है, जिससे रोजाना की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
वेबदुनिया से चालकों ने कहा: "हम दिनभर मेहनत करके बमुश्किल दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करते हैं। अब इस नए तरह के फ्रॉड ने हमें सड़क पर ला दिया है। समझ नहीं आता कि रिक्शा अचानक क्यों बंद हो जाता है, बाद में कुछ लोग आकर पैसे मांगते हैं।"
पुलिस में शिकायत दर्ज: बढ़ते मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न को देखते हुए कुछ पीड़ित ई-रिक्शा चालकों ने एकजुट होकर पुलिस को इस बारे में जानकारी दी है, हालांकि अभी चालकों ने मांग की है कि इस ऐप का गलत इस्तेमाल करने वाले और अवैध वसूली करने वाले गिरोह पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
किस ऐप से बंद हो रहे हैं ई-रिक्शा?
ई-रिक्शा को बीच सड़क पर बंद करने के लिए जिस ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसका नाम "BAT-BMS" (या BAT BMS) है।
कैसे करता है गड़बड़ी : इस ऐप में पहले कोई पासवर्ड या सुरक्षा लॉक (Pin) नहीं था। इसके चलते कोई भी व्यक्ति 10-15 मीटर के दायरे में इस ऐप को खोलकर आस-पास के ई-रिक्शा की बैटरी को ब्लूटूथ के जरिए बिना किसी परमिशन के कनेक्ट कर लेता है। ऐप के अंदर एक 'डिस्चार्ज स्विच' (पावर ऑन/ऑफ) होता है, जिसे दबाते ही बैटरी से मोटर में करंट जाना बंद हो जाता है और रिक्शा अचानक थम जाता है।
वसूली का तरीका: बदमाश जब BAT-BMS ऐप से रिक्शा बंद कर देते हैं, तो वे खुद ही ई-रिक्शा चालक के पास "मददगार" या "मैकेनिक" बनकर पहुंचते हैं। वे चालक को झांसा देते हैं कि गाड़ी चालू करने के लिए कोई विशेष ऐप डाउनलोड करना होगा या उनके पास उसे चालू करने का कोई 'सीक्रेट टूल' है।
अनलॉक का सच: असल में वे उसी BAT-BMS ऐप में जाकर सिर्फ 'ऑन' (ON) का बटन दबा देते हैं और रिक्शा तुरंत चालू हो जाता है। इस छोटे से काम के लिए वे गरीब चालकों से 200 से 300 रुपये या उससे ज्यादा की अवैध वसूली (सर्विस चार्ज के नाम पर) कर रहे हैं।
बचाव के लिए क्या करें : अब इस समस्या के सामने आने के बाद कंपनियों ने इस ऐप में पासवर्ड ऑथेंटिकेशन (Password Protection) अनिवार्य कर दिया है। ई-रिक्शा चालक अपने बैटरी डीलर या कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर पर जाकर अपनी बैटरी के ब्लूटूथ सिस्टम में पासवर्ड या पिन (PIN) सेट करवा सकते हैं, ताकि कोई अनजान व्यक्ति उनके रिक्शे को कनेक्ट न कर सके। यदि कोई ऐसी हरकत करता मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
