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असुरों के गुरु शुक्राचार्य के बारे में 10 रोचक तथ्‍य

शुक्रवार,अक्टूबर 9, 2020
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बहुत कम लोग जानते हैं कि भाद्रपद मास की शुक्ल अष्टमी से लेकर श्राद्ध की अष्टमी तक महालक्ष्मी के विशेष आशीष बरसते हैं। ये नाम आपको धन-धान्य, सुख-संपत्ति, वैभव, कीर्ति, ऐश्वर्य, सौभाग्य की प्राप्ति देंगे।
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एक बार लोकहित के लिए कठोर तपस्या कर रहे महर्षि दधीचि के तप के तेज से तीनों लोक आलोकित हो उठे, लेकिन इन्द्र के चेहरे का तेज जाता रहा, क्योंकि उसे लगा
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भारत में आजादी के आंदोलन में नरम दल और गरम दल से जुड़े नेताओं को ही स्वतं‍त्रता दिवस पर याद किया जाता है परंतु यह बहुत कम ही लोग जानते हैं कि आजादी की अलख जनाने वाले हमारे कई संत थे जिन्होंने सामाजिक उत्थान और आंदोलन के साथ ही स्वतंत्रता आदोलन में ...
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27 जुलाई 2020, सोमवार को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती है। उनका अवतरण श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी को हुआ था।
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आजकल तो कोई भी व्यक्ति किसी को भी गुरु बनाकर उसकी घर में बड़ीसी फोटो लगाकर पूजा करने लगा है और ऐसा वह इसलिये करता है क्योंकि वह भी उसी गुरु की तरह गुरु घंटाल होता है। कथावाचक भी गुरु है और दुष्कर्मी भी गुरु हैं। आश्रम के नाम पर भूमि हथियाने वाले भी ...
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हिंदू धर्म में गुरु दक्षिणा का महत्व बहुत अधिक माना गया है। गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने के बाद जब अंत में शिष्य अपने घर जाता है तब उसे गुरु दक्षिणा देनी होती है।
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एक ऐसी आरती जिसका हिन्दू शास्त्रों में कोई उल्लेख नहीं मिलता लेकिन फिर भी यह आरती इतनी प्रचलित और प्रसिद्ध है कि यह आरती हिन्दू धर्म के हर मंदिरों में गायी जाती है, लेकिन इस समय यह आरती क्यों ट्रेंड कर रही है?
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आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी (13) के दिन महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत नामदेव की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। नामदेव भारत के महाराष्ट्र में जन्मे संत-कवि है।
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जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य के बारह शिष्यों में से एक संत कबीर सभी से अलग थे। उन्होंने गुरु से दीक्षा लेकर अपना मार्ग अलग ही बनाया और संतों में वे शिरोमणि हो गए। कुछ लोग कबीर को गोरखनाथ की परम्परा का मानते हैं, जबकि उनके गुरु रामानंद वैष्णव धारा से ...
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प्रतिवर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन महान कवि एवं संत कबीर की जयंती मनाई जाती है। इस बार यह तिथि 5 जून को है। कबीर भारतीय मनीषा के प्रथम विद्रोही संत हैं, उनका विद्रोह अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के विरोध में सदैव मुखर रहा है।
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साड़ी एक गई, मैं दूसरी बना दूंगा। पर तुम्हारी ज़िन्दगी एक बार अहंकार में नष्ट हो गई तो दूसरी कहां से लाओगे तुम? तुम्हारा पश्चाताप ही मेरे लिए बहुत कीमती है।
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रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक थे। रवींद्रनाथ टैगोर एशिया के प्रथम व्‍यक्ति थे, जिन्‍हें नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया था।
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गुरुदेव का कहना है कि हम लोग पृथ्वी पर प्राचीनतम देश की संतान हैं। पराये धर्म को स्वीकार करने की अपेक्षा मृत्यु स्वीकारना श्रेष्ठ है।
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अपनी सुयोग्य लेखन क्षमता से करोड़ों पाठकों के दिलों पर राज करने वाले गुरुदेव का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। आठ वर्ष की नन्ही उम्र से उनकी लेखन यात्रा आरंभ हुई।
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रवीन्द्रनाथ टैगोर नोबेल पुरस्कार विजेता एवं भारतमाता के ऐसे सच्चे सपूत हैं, उन्हें हम नमन करते हैं।
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कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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आदि शंकराचार्यजी का काल लगभग 2200 वर्ष पूर्व का है। दयानंद सरस्वती जी 137 साल पहले हुए थे। आज के इतिहासकार कहते हैं कि आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में हुआ और उनकी मृत्यु 820 ईस्वी में। मतलब वह 32 साल जीए। अब हम असली बात समझते हैं।
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कवि सूरदास का जन्म दिल्ली के पास सीही नाम के गांव में बहुत निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके तीन बड़े भाई थे।
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श्री रामानुजाचार्य की पूजा पूरे देश में की जाती है। भारत के दक्षिणी, उत्तरी हिस्सों में उनके भक्त यह दिन विशेष उत्सव के रूप में मनाते हैं।
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