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चेटीचंट उत्सव : भगवान झूलेलाल की जयंती पर जानिए 7 खास बातें

सोमवार,मार्च 23, 2020
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20 मार्च को मां कर्मादेवी जयंती मनाई जा रही है। मां कर्मादेवी भगवान की महान भक्त थीं, इसलिए श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे।
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15 मार्च 2020, रविवार को एकनाथ षष्‍ठी मनाई जा रही है। प्रसिद्ध मराठी संत एकनाथ जी का जन्म हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र कृष्ण षष्ठी को पैठण में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री सूर्यनारायण तथा माता का नाम रुक्मिणी था।
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संत तुकाराम का जन्म 17वीं सदी में पुणे के देहू कस्बे में हुआ था। उनके पिता छोटे-से काराबोरी थे। उन्होंने महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन की नींव डाली।
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चैतन्य महाप्रभु ऐसे संत हुए हैं जिन्होंने भक्ति मार्ग का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। चैतन्य देव का आविर्भाव पूर्वबंग के अपूर्व धाम नवद्वीप में फाल्गुन पूर्णिमा, होली के दिन हुआ था
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संत कवि दादू दयाल का जन्म फागुन सुदी आठ बृहस्पतिवार संवत् 1601 (सन् 1544 ई.) को अहमदाबाद हुआ था। उनके पिता का नाम लोदीराम और माता का बसी बाई था। उनके पिता धुनिया थे। पिंजारा रुई धुनने वाली जाति को धुनिया भी कहा जाता है। दादू दो पुत्र गरीबदास और ...
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भारत के एक महान संत एवं विचारक रहे स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म तारीख के अनुसार उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के एक प्रांत कामारपुकुर गांव में हुआ था।
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यह कहानी महाराष्ट्र के महान संत ज्ञानेश्वर से जुड़ी हुई है। ज्ञानेश्वर का जन्म 1275 ईस्वी में महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले में पैठण के पास आपेगांव में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। 21 वर्ष की आयु में ही संसार का त्यागकर समाधि ग्रहण कर ली ...
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राष्ट्रसंत गाडगे बाबा सच्चे निष्काम कर्मयोगी थे। उनका बचपन का नाम डेबूजी झिंगराजी जानोरकर था। गाडगे बाबा का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र
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महर्षि दयानंद सरस्वती ऐसे पहले महामानव थे, जिन्होंने वेदों को सत्य विद्याओं की पुस्तक कहा ही नहीं सिद्ध भी किया। ईश्वर और उसका दिव्य ज्ञान वेद। ज्ञान-विज्ञान का मूल स्रोत सर्वज्ञ ईश्वर का दिया
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समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म मोरबी के पास काठियावाड़ क्षेत्र जिला राजकोट, गुजरात में 12 फरवरी सन् 1824 में हुआ। तिथि के अनुसार फल्गुन मास की कृष्ण दशमी के दिन उनका जन्म हुआ था। मूल नक्षत्र में जन्म होने के कारण उनका नाम मूलशंकर रखा गया ...
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मेरी सिफारिश करके तुमने अच्‍छा नहीं किया, गुरुजी तो हमारे हितैषी हैं। दंड देते हैं तो हमारी भलाई के लिए ही। हम कहीं बिगड़ न जाएं, उनको यही चिंता रहती है।' यह दयानंद आगे चलकर महर्षि दयानंद बने और वैदिक धर्म की स्थापना हेतु 'आर्य समाज' के संस्थापन ...
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फाल्गुन मास की कृष्ण नवमी गुरु रामदास स्वामी के भक्तों के लिए बहुत महत्व रखती हैं, क्योंकि इसी दिन रामदास स्वामी ने समाधि ली थी। इस वर्ष दास नवमी 17 फरवरी, सोमवार को मनाई जा रही है।
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महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत थे समर्थ स्वामी रामदास। वे महाराजा छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। उनके विचारों ने लोगों और समाज को एक नई दिशा दी। इतना ही नहीं उनके विचारों पर अमल करने से आप स्वयं अपने जीवन की राह आसान बना लेंगे।
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धर्म सुधार हेतु अग्रणी रहे दयानंद सरस्वती ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी और पाखण्ड खण्डिनी पताका फहराकर कई उल्लेखनीय कार्य किए। यही दयानंद आगे चलकर महर्षि दयानंद बने और वैदिक धर्म की स्थापना हेतु 'आर्य समाज' के संस्थापन के रूप में ...
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गजानन महाराज का प्रकटोत्सव 14 से 16 फरवरी 2020 तक मनाया जा रहा है। इसमें 3 दिवसीय कार्यक्रम होंगे, जिसमें श्रीजी का पारायण, चरण पादुका पूजन और भ्रमण तथा जलाभिषेक, कलश पूजन, यज्ञ और इसके बाद भंडारे या महाप्रसादी का वितरण होता है।
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संत रविदास बचपन से ही परोपकारी और दयालु स्वभाव के थे। दूसरों की सहायता करना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। खास कर साधु-संतों की सेवा और प्रभु स्मरण में वे विशेष ध्यान लगाते थे।
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18 सिद्धों में से एक बोगर एक तमिल सिद्धार थे जो 550 से 300 ईसा पूर्व के बीच हुए थे। बोगर ने एक किताब 'बोगर 7000' लिखी है। बोगर 7000 में 7000 गाने हैं, और इसमें सिद्ध चिकित्सा के बारे में विवरण है।
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शुक्राचार्य का नाम तो सभी ने सुना होगा। वे दैत्य अर्थात असुरों के गुरु थे। उनकी ख्‍याति दूर-दूर तक फैली थी। आओ जानते हैं उनके बारे में 10 रोचक जानकारी।
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रामानंद अर्थात रामानंदाचार्य वैष्णव भक्तिधारा के महान संत हैं। उन्होंने उत्तर भारत में वैष्णव सम्प्रदाय को पुनर्गठित किया तथा वैष्णव साधुओं को उनका आत्मसम्मान दिलाया।
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