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नवरात्रि का 7वां दिन, कैसे करें मां सरस्वती का आह्वान? पढ़ें ये विशेष मंत्र, करें यह उपाय

गुरुवार,अक्टूबर 22, 2020
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कालरात्रि जय जय महाकाली काल के मुंह से बचाने वाली दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा महा चंडी तेरा अवतारा पृथ्वी और आकाश पर सारा
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हिन्दू धर्म में देवी आद्य‍शक्ति देवी दुर्गा या अब्बिका को सर्वेश्वरी और त्रिदेवजननी कहा गया है। वेद, उपनिषद, पुराण सहित अन्य हिन्दू शास्त्रों में उनकी उत्पत्ति और स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया गया है। यहां पढ़िये देवी की महिमा का शस्त्रोक्त वर्णन।
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दशहरा पर्व विजय का प्रतीक है। इन दिनों मौसम खुश हो जाता है। पौधों पर बहार आ जाती है। गेंदे के फूल चारों तरफ मुस्कुराने लगते हैं। सवाल यह कि इस पर्व पर गेंदे के फूल क्यों सजाते हैं? वास्तव में ऐसा इसलिए है कि गेंदे इस मौसम में सहजता से उपलब्ध होते ...
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तिथियों का ज्ञान हमें ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में मिलता है। किस तिथि में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इस संबंध में आयुर्वेद में भी उल्लेख मिलता है। नवरात्रि में व्रत रखा है तो कई घरों में सप्तमी, अष्टमी या नवमी को व्रत का समापन करते हैं। समापन के ...
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नवरात्रि की सप्तमी तिथि को माता का कालरात्रि रूप का पूजन किया जाता है। इनका रूप अन्य रूपों से अत्यंत भयानक है, लेकिन माता अत्यंत दयालु-कृपालु हैं।
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वर्ष 2020 में मतान्तर होने के कारण पंचांगों में विजयादशमी तिथि 25 अक्टूबर व 26 अक्टूबर दो दिन बताई जा रही है। अब श्रद्धालुगणों के लिए यह दुविधा है कि वे किस दिन "विजयादशमी" का पर्व मनाएं।
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मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है, इस देवी के तीन नेत्र हैं। ये तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं। इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है।
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राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण को दशानन भी कहते हैं। कहते हैं कि रावण लंका का तमिल राजा था। सभी ग्रंथों को छोड़कर वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण महाकाव्य में रावण का सबसे 'प्रामाणिक' इतिहास मिलता है।
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नवरात्रि के पावन पर्व पर हवन करने का विशेष महत्व है अत: अगर आप कोरोना की वजह से घर पर ही सरल रीति से हवन करना चाहते है तो आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। हम आपके लिए लेकर आए हैं आसान तरीके वाली हवन करने की विधि।
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श्री राम रक्षा स्तोत्र अगर नियमित नहीं पढ़ सकते हैं तो सिर्फ दशहरे पर इसे पढ़ने से भी श्रीराम के आशीष मिलेंगे। यह पाठ अत्यंत चमत्कारी है।
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आश्विन शुक्ल दशमी को मनाए जाने वाले त्योहार को दशहरा और विजयादशमी कहते हैं। इस दिन रावण और महिषासुर के वध के अलावा भी बहुत कुछ घटा था जानिए 10 घटनाएं। उल्लेखनीय है कि जब दशमी, नवमी से संयुक्त हो तो कल्याण एवं विजय के लिए अपराजिता देवी की पूजा दशमी ...
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हवन तो विधिवत रूप से पंडितजी ही करवाते हैं, लेकिन कोरोना काल में आप खुद ही कैसे घर में हवन करें जानिए इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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नवरात्रि का पर्व हो और व्रत-उपवास की बात न हो, क्या भला ऐसा हो सकता है। नवरात्रि पर्व में भक्तजन उपवास करते हैं, ऐसे समय में व्रत के दौरान अपने खान-पान यानी उपवास के दिनों
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प्रसिद्ध शिर्डी स्थित श्री साईं बाबा ने सन् 1918 में दशहरे के दिन दोपहर के समय आखिरी सांस ली थी। ऐसा कहा जाता है कि साईं बाबा ने अपने भक्तों से कहा था कि दशहरा का दिन उनके दुनिया से विदा होने के लिए सबसे अच्छा दिन है और इसका संकेत भी उन्होंने पहले ...
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दोनों दालों को कचोरी बनाने के 3-4 घंटे पूर्व भिगो दें। कुछ दाल छोड़ कर बाकी को दरदरा पीस लें। अब कड़ाही में थोड़ा-सा तेल लेकर सौंफ का बघार व हींग डालें,
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सातवें नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है। इसके अलावा गुड़ का भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में खाना सेहत के लिए भी फायदेमंद है........
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कई घरों में नवरात्रि पर सप्तमी, अष्टमी या नवमी की पूजा होती है। पूजा के बाद हवन भी किया जाता है। हवन तो विधिवत रूप से पंडितजी ही करवाते हैं, लेकिन लॉकडाउन में आप खुद ही कैसे घर में हवन करें जानिए इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
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नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी को पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो।
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भगवान कृष्ण जैसा पति पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी। यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी। इसीलिए वह ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
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