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Mahavir Jayanti 2020 : अहिंसा के महान साधक भगवान महावीर की जयंती

शुक्रवार,अप्रैल 3, 2020
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रंग लाग्यो महावीर, थारो रंग लाग्यो, थारी भक्ति करवाने म्हारो भाव जाग्यो ॥ रंग लाग्यो…॥
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यहां पढ़ें जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की आरती। जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो।
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भगवान महावीर ने विभिन्न विषयों पर दुनिया के लोगों के लिए संदेश दिए हैं। जिन्हें हम महावीर के उपदेश के नाम से जानते हैं। यहा हमने महावीर स्वामी आत्मा पर दिए गए उपदेश प्रस्तुत कर रहे हैं। आप भी जानिए क्या कहते हैं भगवान महावीर-
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राम भक्त हनुमान जी का नाम ही काफी है संकटों को दूर करने के लिए। सभी देवताओं के प्रिय हनुमानजी के बारे में 10 खास बातें।
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हिन्दू नववर्ष की पहली एकादशी 4 अप्रैल 2020, शनिवार को मनाई जा रही है। चैत्र शुक्ल एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए जानें एकादशी की व्रत कथा एवं मुहूर्त
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कैवल्य ज्ञान क्या है यह समझाना मुश्‍किल है। यहां संक्षिप्त में ही जानें। इसमें कोई संशय नहीं कि महावीर का मार्ग पूर्णत:, स्पष्ट और कैवल्य ज्ञान प्राप्त करने का मार्ग है। यह राजपथ है। उनके उपदेश हमारे जीवन में किसी भी तरह के विरोधाभास को नहीं रहने ...
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वेदों में अहिंसा के सूत्र मिलते हैं। कई अन्य अहिंसक लोग भी हुए हैं। अहिंसा पर प्रवचन देने वाले भी अनेक हैं, लेकिन महावीर स्वामी सबसे अलग हैं और उनकी अहिंसा की धारणा भी कहीं ज्यादा संवेदनशील है। संसार के प्रथम और अंतिम व्यक्ति हैं भगवान महावीर, ...
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राम का जीवन आम आदमी का जीवन है। आम आदमी की मुश्किल उनकी मुश्किल है.जब राम अयोध्या से चले तो साथ में सीता और लक्ष्मण थे। जब लौटे तो पूरी सेना के साथ। एक साम्राज्य को नष्ट कर और एक साम्राज्य का निर्माण करके. राम अगम हैं संसार के कण-कण में विराजते हैं।
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चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमानजी का जन्म भी रहता है। ऐसे में यह पूर्णिमा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। चैत्र पूर्णिमा को चैती पूनम के नाम से भी जाना जाता है। आओ जानते हैं कि कौनसे 5 प्रमुख कार्य इस पूर्णिमा के दिन करना चाहिए।
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दुनिया एक झमेला है, आने-जाने का एक मेला है, अनन्त बार जन्म लिए अनन्त बार मरण किए।
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जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंककर भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया।
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने 'कैवल्य ज्ञान' की जिस ऊंचाई को छुआ था वह अतुलनीय है। उनके उपदेश हमारे जीवन में किसी भी तरह के ...
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संपूर्ण ब्रह्मांड में रामभक्त हनुमानजी की शक्ति अपरंपार। वे सर्वशक्तिमान होने के बावजूद विनम्र, भक्त और दयालु हैं। अपने और राम के भक्तों के लिए वे तुरंत ही दौड़े चले आते हैं। उनकी भक्त से सभी तरह के संकट मिट जाते हैं। आओ जानते हैं कि महाभारत के काल ...
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एकादशी की तरह की वर्ष में 24 प्रदोष होते हैं। एकादशी या प्रदोष दोनों में से कोई सा भी एक व्रत रखना चाहिए। जो भी प्रदोष जिस वार को आता है उसका विशेष फल होता है। इस बार रविवार को प्रदोष आ रहा है। जानिए रविवार को प्रदोष का व्रत रखने के 5 फायदे।
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रामभक्त हनुमानजी सर्वशक्तिमान और सर्वमान्य और सर्वज्ञ है। शोधानुसार प्रभु श्रीराम का जन्म 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था, जबकि हनुमनाजी का जन्म कहां हुआ था यह स्पष्ट नहीं है। कपिस्‍थल या किष्किंधा में उनके जन्म होने की बात कही जाती है।
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गुहराज निषाद ने अपनी नाव में प्रभु श्रीराम को गंगा के उस पार उतारा था। आज गुहराज निषाद के वंशज और उनके समाज के लोग उनकी पूजा अर्चन करते हैं। चैत्र शुक्ल पंचमी को उनकी जयंती है। गुहराज निषाद ने पहले प्रभु श्रीराम के चरण धोए और फिर उन्होंने अपनी नाम ...
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भगवान श्रीराम से रामनवमी पर आशीर्वाद मांगें कि हे परमात्मा, मेरे शरीर, मन और बुद्धि की रक्षा करना। साथ ही इस मंत्र का पाठ करें-
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पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस-19 से लड़ रहा है। इतने भयानक समय में भी हम अपने-अपने ईष्ट का स्मरण कर रहे हैं। डॉक्टर के पास इस वायरस का स्थायी इलाज नहीं है।
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माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं।
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