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When is Gangaur vrat 2021: कौन हैं माता गणगौर, क्यों मनाई जाती है गणगौर तीज

मंगलवार,अप्रैल 13, 2021
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सोमवार को चांद नहीं दिखा अत: 14 अप्रैल से रमजान (Ramadan 2021) का पाक महीना शुरू होगा। कोरोना संकट के इस दौर में रमजान की रौनक बाजारों में दिखाई नहीं देगी।
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चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा के दूसरे दिन द्वितीया पर सिंधारा दौज या सिंधारा दूज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व खासकर उत्तर भारतीय महिलाओं का पर्व है। दक्षिण भारत में, खासकर तमिलनाडु और केरल में, महेश्वरी सप्तमत्रिका पूजा सिंधारा दूज के दिन की जाती ...
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यह मां नर्मदा की स्तुति दुर्गा अष्टमी-नवमी के दिन करें। सबका उद्धार करने वालीं मां बीमारी से मुक्ति दिलाएंगी।
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चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 13 अप्रैल से प्रारंभ हो चुकी जो 22 अप्रैल तक रहेगी। यदि आप नवरात्रि का व्रत रख रहें हैं तो आपको 9 खास बातों का जान लेना चाहिए।
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सिंध प्रांत के हिन्दुओं में झूलेलाल को पूजने पूजने की बहुत मान्यता है। सिंध प्रांत के हिन्दुओं को सिंधी कहा जाता है। झूलेलाल की जयंती चैत्र शुक्ल माह की द्वितीया को आती है। भगवान झूलेलाल हिन्दूदेव वरुणदेव के अवतार माने जाते हैं।
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देवी ब्रह्मचारिणी की की कृपा से सर्वत्र सिद्धि तथा विजय की प्राप्ति होती है। जो साधक मां के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है
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मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।
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13 अप्रैल को वर्ष प्रतिपदा है। इस दिन यानी आगामी नववर्ष पर आप भी अपने गृहनिवास/ प्रतिष्ठान पर ध्वज पूजन अवश्य करें-
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नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी के नाम, पढ़ें उनकी पावन आरती-
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वर्ष 2021 में गणगौर व्रत 15 अप्रैल को है। गणगौर लोकपर्व होने के साथ-साथ रंगबिरंगी संस्कृति का अनूठा उत्सव है। चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जानेवाला यह पर्व विशेष तौर पर केवल महिलाओं के लिए ही होता है।
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सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में गोचर करने को संक्रांति कहते हैं। सूर्य प्रत्येक माह दूसरी राशि में गोचर करता है। इस तरह वर्ष में 12 संक्रातियां होती हैं। सूर्य मेष राशि से अंतिम राशि मीन तक भ्रमण करता है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश को मेष ...
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Hanuman Jayanti 2021: जयंती अर्थात जिस दिन उनका जन्म हुआ था। हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है। पहली हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा को अर्थात ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच और दूसरी कार्तिक कृष्‍ण ...
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देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश / घट की स्थापना की जाती है। घट स्थापना करना अर्थात नवरात्रि की कालावधि में ब्रह्मांड में कार्यरत शक्ति तत्व का घट में आवाहन कर उसे कार्यरत करना।
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एक बार भगवान शंकर तथा पार्वतीजी नारदजी के साथ भ्रमण को निकले। चलते-चलते वे चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन एक गांव में पहुंच गए। उनके आगमन का समाचार सुनकर गांव की श्रेष्ठ कुलीन स्त्रियां उनके स्वागत के लिए
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गणगौर पर्व के दिनों में जहां भगवान शिव-पार्वती और गणगौर की आराधना की जाती हैं, वहीं गणगौर के गीत गाकर माता गौरी की प्रसन्न किया जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा समस्या पूजन
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जहां आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस दिन को उगादि तो महाराष्ट्र में इसे ग़ुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाती है। आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
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इस साल शक्ति की उपासना का ये पर्व यानी चैत्र नवरात्रि मंगलवार, 13 अप्रैल 2021 से शुरू हैं। 21 अप्रैल तक ये पर्व चलेगा। नवरात्रि के आरंभ के साथ ही हिन्दू नववर्ष-2021 की शुरुआत भी होगी। इस बार का महिसासुर मर्दिनी का आगमन दुराचारी,राक्षसी प्रवृत्ति के ...
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जहां आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस दिन को उगादि तो महाराष्ट्र में इसे ग़ुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाती है। आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
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इस माह की दिनांक 13 अप्रैल, दिन मंगलवार से चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने जा रही है। हमारे सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। हिन्दू वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ, मासों में 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है ...
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