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ध्वज संहिता: 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर कैसे फहराएं तिरंगा, क्या हैं नियम?

Written By WD Feature Desk
Updated: गुरुवार, 14 अगस्त 2025 (16:50 IST)
jhanda farane ke niyam: 15 अगस्त का दिन भारत के लिए केवल एक राष्ट्रीय पर्व ही नहीं, बल्कि भावनाओं, गर्व और देशभक्ति का ऐसा संगम है, जो हर भारतीय के दिल में लहराता है। इस दिन जब हमारे राष्ट्र ध्वज तिरंगे को हवा में लहराया जाता है, तो वह न सिर्फ हमारे स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों की याद दिलाता है, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि हम अपने देश के प्रतीकों का सम्मान कैसे करें। तिरंगा हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, और इसके उपयोग, प्रदर्शन और संरक्षण के लिए भारत सरकार ने ‘भारतीय ध्वज संहिता’ बनाई है। इसे जानना और पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, ताकि हम अपनी आजादी और उसके प्रतीकों का सम्मान कर सकें।
 
भारतीय ध्वज संहिता क्या है?
भारतीय ध्वज संहिता को 26 जनवरी 2002 से पूरे देश में लागू किया गया, जिसका उद्देश्य तिरंगे के सम्मान और गरिमा को बनाए रखना है। इस संहिता में ऐसे दिशा-निर्देश शामिल हैं, जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि राष्ट्रीय ध्वज के साथ किसी भी प्रकार का अनादर न हो। इसके अनुसार, जो भी झंडा ध्वजारोहण के लिए उपयोग किया जाएगा, वह आयताकार आकार का होना चाहिए और उसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 निर्धारित है। राष्ट्रीय ध्वज पर किसी भी प्रकार का लेख, चित्र या डिज़ाइन नहीं होना चाहिए। यदि झंडा फटा, गंदा या क्षतिग्रस्त है, तो उसे फहराने की अनुमति नहीं है। यह नियम तिरंगे के पवित्र स्वरूप और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए बनाए गए हैं।
 
ध्वज संहिता क्यों जरूरी है?
ध्वज संहिता का उद्देश्य तिरंगे के सही उपयोग और सम्मान को सुनिश्चित करना है। यह केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है, बल्कि हमारे देश की आत्मा का प्रतीक है। गलत तरीके से फहराना, उल्टा लगाना, या गंदा रखना, तिरंगे का अपमान माना जाता है। कई बार लोग अनजाने में नियम तोड़ देते हैं, जैसे कि इसे प्लास्टिक में बनाना, या सजावट में ऐसे इस्तेमाल करना जो संहिता के विरुद्ध हो। इसीलिए, सही नियम जानना ज़रूरी है।
 
तिरंगे के रंग और उनके मायने - 
भारतीय तिरंगा तीन रंगों से बना है-
इन रंगों का सही क्रम और अनुपात बनाए रखना बेहद जरूरी है।
 
15 अगस्त पर तिरंगा फहराने के मुख्य नियम -
तिरंगा फहराने के दौरान ध्यान देने योग्य बातें-

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