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मोदी, इंदिरा या नेहरू, किसके नाम है लाल किले पर सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड

Written By WD Feature Desk
Updated: गुरुवार, 14 अगस्त 2025 (18:09 IST)
Flag hoisting record India: इस साल 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लगातार12वीं बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे. यह उपलब्धि किसी गैर-कांग्रेस प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें एक खास पहचान दिलाएगी. प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 2014 में पहली बार लाल किले से झंडा फहराया. इसके बाद उनके कार्यकाल के साथ उन्होंने हर साल लाल किले से तिरंगा फहराया और देश को संबोधित किया है.

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सबसे अधिक बार फहराया है तिरंगा
लाल किले पर सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम है। उन्होंने 17 बार इस ऐतिहासिक किले की प्राचीर से राष्ट्रध्वज फहराया था। यह एक ऐसा कीर्तिमान है जो आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है। नेहरू ने 15 अगस्त 1947 से 1964 तक लगातार इस परंपरा को निभाया, जो उनकी लंबी प्रधानमंत्री कार्यकाल का एक हिस्सा था।

दूसरे और तीसरे नंबर पर कौन?
नेहरू के बाद दूसरे नंबर पर उनकी बेटी और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हैं। उन्होंने कुल 16 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया, जो उनके पिता से सिर्फ एक कम है। इंदिरा गांधी ने 1966 से 1977 तक और फिर 1980 से 1984 तक देश की बागडोर संभाली थी।

तीसरे नंबर पर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आता है। 15 अगस्त 2025 को वे लगातार 12वीं बार लाल किले से तिरंगा फहराएंगे। 2014 में पदभार संभालने के बाद से वे हर साल इस परंपरा को निभा रहे हैं। इस मामले में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पीछे छोड़ दिया है।

अन्य प्रधानमंत्रियों की सूची
लाल किले पर तिरंगा फहराने वाले अन्य प्रधानमंत्रियों की संख्या इस प्रकार है:
• मनमोहन सिंह: 10 बार (2004-2013)
• अटल बिहारी वाजपेयी: 6 बार
• राजीव गांधी: 5 बार
• पी.वी. नरसिम्हा राव: 5 बार
• लाल बहादुर शास्त्री: 2 बार
• मोरारजी देसाई: 2 बार
• चौधरी चरण सिंह: 1 बार
• वी.पी. सिंह: 1 बार
• एच.डी. देवेगौड़ा: 1 बार
• आई.के. गुजराल: 1 बार
यह रोचक तथ्य है कि कुछ प्रधानमंत्रियों, जैसे गुलजारीलाल नंदा और चंद्रशेखर, को लाल किले पर तिरंगा फहराने का मौका नहीं मिल पाया क्योंकि वे कम समय के लिए प्रधानमंत्री रहे थे।

लाल किले की परंपरा: एक ऐतिहासिक महत्व
लाल किले पर तिरंगा फहराना सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि यह सत्ता के हस्तांतरण और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में शुरू हुई एक गौरवशाली परंपरा है। 15 अगस्त 1947 को, जब भारत को आज़ादी मिली, तो पंडित नेहरू ने यहीं से पहली बार तिरंगा फहराया था। यह उस प्रतीक को दर्शाता है कि अब भारत पर किसी विदेशी ताकत का नहीं, बल्कि भारतीयों का राज है।

लाल किले से होने वाला प्रधानमंत्री का संबोधन भी एक खास महत्व रखता है। यह पूरे देश को संबोधित करने और भविष्य की दिशा तय करने का एक मंच होता है। हर साल यह हमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और देश की एकता का महत्व याद दिलाता है।ALSO READ: कैसे मुगलों की गलतियों ने भारत को बना दिया अंग्रेजों का गुलाम? जानिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने कैसे जमाई अपनी जड़ें

 
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