ganesh chaturthi

होलाष्टक 2020 : भक्त प्रह्लाद को दी गई थी यातनाएं, इसलिए है अशुभ 8 दिन का समय

Updated: शनिवार, 7 मार्च 2020 (12:43 IST)
Holashtak 2020

होलाष्टक शुभ क्यों नहीं होता है? इसके संबंध में दो पौराणिक कथाएं हैं जो भक्त प्रह्लाद और कामदेव से जुड़ी हुई हैं।
 
होली से पूर्व 8 दिनों के समय को होलाष्टक कहते हैं, जो इस वर्ष 02 मार्च से लेकर 09 मार्च तक है। अपशगुन के कारण इसमें मांगलिक कार्यों को करना वर्जित होता है।
 
होलाष्टक होली से पहले के 8 दिनों को कहा जाता है। इस वर्ष होलाष्टक 02 मार्च से प्रारंभ हो रहा है, जो 09 मार्च यानी होलिका दहन तक रहेगा। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा ​तिथि तक होलाष्टक माना जाता है। 09 मार्च को होलिका दहन के बाद अगले दिन 10 मार्च को रंगों का त्योहार होली धूमधाम से मनाया जाएगा। होलाष्टक के 8 दिनों में मांगलिक कार्यों को करना निषेध होता है। इस समय मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है। होलाष्टक में तिथियों की गणना की जाती है। मतांतर से इस बार होलाष्टक 03  मार्च से प्रारंभ होकर 09 मार्च को समाप्त माना जा रहा है, ऐसे में यह कुल 7 दिनों का हुआ। लेकिन तिथियों को ध्यान में रखकर गणना की जाए तो यह अष्टमी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक है, ऐसे में दिनों की संख्या 8 होती है। ज्यादातर विद्वान भानु सप्तमी 2 मार्च से इसका आरंभ मान रहे हैं। 
 
होलाष्टक शुभ क्यों नहीं होता है? इसके संबंध में दो पौराणिक कथाएं हैं, जो भक्त प्रह्लाद और कामदेव से जुड़ी हुई हैं। आइए जानते हैं कि भक्त प्रह्लाद और कामदेव के साथ ऐसा क्या हुआ था, कि होलाष्टक अशुभ माने जाने लगा।

 
होलाष्टक में भक्त प्रह्लाद को दी गई थी यातनाएं
 
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद को भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए अनेक प्रकार की यातनाएं दी थीं। भक्त प्रह्लाद को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा ​तिथि तक कई प्रकार की यातनाएं दी गईं, उनको मारने का भी प्रयास किया गया। लेकिन भगवान विष्णु ने हर बार उनके प्राणों की रक्षा की।
 
आठवें दिन यानी फाल्गुन पूर्णिमा की रात हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को अपने बेटे के साथ अग्नि में बैठाने की योजना बनाई, ताकि वह जलकर मर जाए और भगवान विष्णु की भक्ति से मुक्ति मिले। उसके राज्य में कोई भगवान विष्णु का नाम न ले।
 
योजना के अनुसार, होलिका भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। होलिका ने अपने दिव्य वस्त्र पहन रखे थे, ताकि अग्नि से उसका बाल भी बांका न हो, लेकिन भगवान विष्णु की ऐसी कृपा हुई कि प्रह्लाद बच गया और होलिका जलकर मर गई। इस कारण से हर वर्ष होली से पूर्व रात को होलिका दहन होता है। होलिका दहन से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहते हैं और यह अशुभ माना जाता है।
 
भगवान शिव ने कामदेव को किया था भस्म
 
होलाष्टक को अशुभ मानने का एक कारण यह भी है कि भगवान शिव ने फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि को कामदेव को भस्म कर दिया था। कामदेव का अपराध यह था कि उन्होंने भगवान शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया था। कामदेव की पत्नी रति ने उनके अपराध के लिए शिवजी से क्षमा मांगी, तब भोलेनाथ ने कामदेव को पुनर्जीवन देने का आश्वासन दिया।
 

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 18 सितंबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को पांचवें दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं

बुधादित्य राजयोग से चमकेगा 4 राशियों का भाग्य! कन्या राशि में बुध-सूर्य की युति से मिलेंगे शुभ संकेत

भविष्य मालिका की भविष्यवाणी: क्या मक्का-मदीना में होगा घोर युद्ध? जानें क्या किया गया है दावा

नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर: जानिए कुंडली में क्या कहते हैं ग्रह-नक्षत्र और भविष्य के संकेत

अगला लेख