गुरुवार, 2 फ़रवरी 2023
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उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्तियां

होलकर राज्य की प्रारंभ से ही यह नीति रही थी कि योग्य व निर्धन छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक सहायता दी जाए, जिससे उनका पूर्ण मानसिक विकास हो सके। लगभग प्रत्येक विद्यालय में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती थी। नगर में 1891 में होलकर महाविद्यालय की स्थापना हुई, तब राज्य व नगर के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा पाने की सुविधा उपलब्ध हो सकी। इस कॉलेज की स्थापना के पूर्व भी इंदौर के छात्र-छात्राएं उच्च अध्ययन कर रहे थे। महाविद्यालय के अभाव में वे भारत के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में जाकर‍ शिक्षा लेते थे। ऐसे लगभग सभी छात्र-छात्राओं को राज्य द्वारा छात्र‍वृत्तियां देकर प्रोत्साहित किया गया था।
 
यह बात 1873-74 की है, जब इंदौर के 4 विद्यार्थी मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा हेतु बंबई जाना चाहते थे। राज्य के शिक्षा विभाग ने उन्हें छात्रवृत्तियां देने की घोषणा की। वे जाकर बंबई के एलकिंस्टन कॉलेज में उच्च अध्ययन हेतु दाखिल हुए। राज्य की ओर से उन्हें 12 रु. प्रतिमाह की छात्रवृत्ति दी जाती थी। इस राशि के मूल्यमान का सहज अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि सोने का भाव उस समय 18 रु. तोला था। वर्तमान स्वर्ण मूल्य से यदि इसका अनुपात निकाला जाए तो छात्रवृत्ति की राशि लगभग 3700 रु. होती है।
 
इसी प्रकार की छात्रवृत्ति तकनीकी महाविद्यालय के एक छात्र तथा पूना हाईस्कूल के एक छात्र को भी दी गई थी। 1881-82 से देहाती क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाने लगी ताकि वे इंदौर में आकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। यह राशि 4 रु. प्रतिमाह थी और होलकर राज्य के जन्मजात विद्यार्थियों को ही दी जाती थी।
 
महाविद्यालयीन शिक्षा पाने वाले छात्रों को राज्य विशेष रूप से प्रोत्साहित करना चाहता था। 1885-86 में होलकर राज्य द्वारा ब्रिटिश भारत की सीमा में स्थित कई महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा पाने के इच्छुक छात्रों को भेजा गया। उन्हें राज्य की ओर से छात्रवृत्तियां भी गईं।
 
1886 में ही ऐसे 11 विद्यार्थी देश के विभिन्न महाविद्यालयों में अध्ययनरत थे जिनके नाम व उनके महाविद्यालयों के नाम इस प्रकार हैं- श्री अजीजुर रहमान खान- इलाहाबाद विश्वविद्यालय, श्री विश्वनाथ रामचंद्र गर्दे- डेक्कन कॉलेज पूना, श्री बालकृष्ण रमाकांत बोबडे- डेक्कन कॉलेज पूना, श्रीधर केशव भौरासकर- फरग्युसन कॉलेज, श्री विट्ठल विष्णु चितले- पूना साइंस कॉलेज, बाबाजी काशीनाथ क्षीरसागर- एलकिंस्टन कॉलेज बंबई, श्री नारायण रामचंद्र केलकर- डॉ. विलसन कॉलेज, श्री शिवराम सदाशिव पीताम्बरे- जबलपुर कॉलेज, श्री सुरेंद्रनाथ दास- कलकत्ता प्रेसीडेंसी कॉलेज, श्री महादेव जनार्दन केतकर तथा श्री सीताराम विष्णु सरवटे- डेक्कन कॉलेज पूना।

इस सभी को 9 से 15 रु. मासिक छात्रवृत्ति दी जाती थी। इन्हीं मेधावी छात्रों में से कई ने होलकर राज्य में उच्च पदों पर रहकर अपनी सेवाएं प्रदान की थीं।