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भगवान गणेश और बुढ़िया

Written By WD Feature Desk
Updated: शुक्रवार, 27 मार्च 2026 (14:00 IST)
एक अंधी बुढ़िया थी, जिसका एक लड़का और बहू थी। वह बहुत गरीब थी। वह अंधी बुढ़िया नित्यप्रति गणेशजी की पूजा किया करती थी। गणेशजी साक्षात्‌ सन्मुख आकर कहते थे कि बुढ़िया माई तू जो चाहे सो मांग ले। बुढ़िया कहती मुझे मांगना नहीं आता सो कैसे और क्या मांगू। तब गणेशजी बोले कि अपने बहू-बेटे से पूछ कर मांग ले।

तब बुढ़िया ने अपने पुत्र और वधू से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहू ने कहा कि पोता मांग ले। तब बुढ़िया ने सोचा कि बेटा-बहू तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं।

अतः उस बुढ़िया ने पड़ोसियों से पूछा तो पड़ोसियों ने कहा कि बुढ़िया तेरी थोड़ी-सी जिंदगी है। क्यों मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले, जिससे तेरी शेष जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए। उस बुढ़िया ने बेटे, बहू तथा पड़ोसियों की बात सुनकर घर में जाकर सोचा, जिससे बेटा-बहू और मेरा सबका ही भला हो वह भी मांग लूं और अपने मतलब की चीज भी मांग लूं।

जब दूसरे दिन गणेशजी आए और बोले, बोल बुढ़िया क्या मांगती है। हमारा वचन है जो तू मांगेगी सो ही पाएगी। गणेशजी के वचन सुनकर बुढ़िया बोली हे गणराज यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों में प्रकाश दें, नाती-पोता दें और समस्त परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष दें।

बुढ़िया की बात सुनकर गणेशजी बोले- बुढ़िया मां तूने तो मुझे ठग लिया। खैर, जो कुछ तूने मांग लिया वह सभी तुझे मिलेगा। यूं कहकर गणेशजी अंतर्ध्यान हो गए।

हे गणेशजी जैसे बुढ़िया मां को मांगे अनुसार आपने सब कुछ दिया है, वैसे ही सबको देना और हमको भी देने की कृपा करना।

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