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भगवान परशुराम और श्री राम एक ही काल में साथ-साथ थे तो दोनों विष्णु के अवतार कैसे हो सकते हैं?

अनिरुद्ध जोशी
शनिवार, 19 अप्रैल 2025 (14:36 IST)
Lord Parshuram and Ram: भगवान विष्णु के मुख्यत: 24 अवतार हुए हैं। प्रत्येक अवतार के बीच कम से कम 2 हजार वर्षो का फासला रहा है परंतु परशुराम जी के काल में ही श्रीराम का अवतार हुआ। परशुराम और राम दोनों को ही विष्णु का अवतार माना जाता है। यह कैसे संभव है कि विष्णु जी ने एक ही काल में दो अवतार ले लिया? परशुराम भृगुवंशी थे और श्रीराम सूर्यवंशी।
 
परशुराम का जन्म: माथुर चतुर्वेदी ब्राह्मणों के इतिहास-लेखक, श्री बाल मुकुंद चतुर्वेदी के अनुसार विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म सतयुग और त्रेता के संधिकाल में 5142 वि.पू. वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन-रात्रि के प्रथम प्रहर प्रदोष काल में हुआ था। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में रात्रि के प्रथम प्रहर में 6 उच्च के ग्रहों से युक्त मिथुन राशि पर राहु के स्थित रहते माता रेणुका के गर्भ से भृगु ऋषि के कुल में परशुराम का प्रादुर्भाव हुआ था। ऋचीक-सत्यवती के पुत्र जमदग्नि, जमदग्नि-रेणुका के पुत्र परशुराम थे। ऋचीक की पत्नी सत्यवती राजा गाधि (प्रसेनजित) की पुत्री और विश्वमित्र (ऋषि विश्वामित्र) की बहिन थी। परशुराम सहित जमदग्नि के 5 पुत्र थे। परशुरामजी ने सहस्रबाहु अर्जुन का वध किया था।
 
रामजी का जन्म: दशरथ पु‍त्र श्रीराम का जन्म त्रेतायुग और द्वापर युग के संधिकाल में हुआ था। सर्वप्रथम ऋषि वाल्मीकि ने ही श्रीराम की कथा लिखी थी। वाल्मीकि जी श्रीराम के ही काल में थे। उन्होंने राम के जन्म काल के ग्रह नक्षत्रों का भी वर्णन किया है जिससे उनके जन्म का समय 5,114 ईस्वी पूर्व निकलकर आता है। यानी राम के जन्म को हुए 7,138 वर्ष हो चुके हैं।
 
परशुराम और राम के अवतारी होने का रहस्य: भगवान विष्णु के अवतारों के 6 प्रकार हैं- अंशावतार, अंशांशावतार, कलावतार, आवेशावतार, पूर्णावतार, परिपूर्णतम अवतार। परशुराम जी विष्णु के आवेशावतार हैं। आवेशावतार में भगवान विष्णु किसी शरीर का उपयोग करके उस शरीर से निकल जाते हैं या उस शरीर का त्याग कर देते हैं। भगवान विष्णुजी ने परशुराम जी के शरीर का उपयोग किया और जो कार्य करना था वह करके वे निकल गए। इसके बाद उन्होंने श्रीराम के रूप में स्वयं ही अवतार लिया। राम जी को उनका पूर्णावतार और श्रीकृष्‍ण जी को उनका परिपूर्णतम अवतार माना जाता है।
 
जब प्रभु श्रीराम ने शिवजी का धनुष तोड़ दिया था तब परशुराम जी क्रोधित होकर वहां आ धमके थे। परंतु उन्होंने श्रीराम में विष्णुजी के दर्शन किए और उस समय विश्वामित्र ने भी उन्हें बताया था कि आपके अवतार रहने का समय समाप्त हो चुका है और अब विष्णुजी स्वयं प्रभु श्रीराम के रूप में हैं। जय श्रीराम।

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