biodatamaker
✕

विश्नोई मेला क्यों प्रसिद्ध है?

Updated: सोमवार, 20 फ़रवरी 2023 (12:22 IST)
राजस्थान में बिश्नोई समाज के लिए प्रकृति प्रेमी हैं। समाज के प्रमुख गुरु जम्भेश्वर को इस समाज के लोग विष्णुजी का अवतार मानते हैं। जम्भो जी ने कुल कुल 29 जीवन सूत्र बताए थे। इसी कारण भी बीस और नौ मिलकर इस समाज का नाम बिश्नोई हो गए। पर्यावरण प्रेमी विश्नोई समाज का प्रतिवर्ष मेला लगता है।
 
फाल्गुन मास में अमावस्या के दिन विश्नोई समाज के लोगों का भव्य मेला आयोजित होता है। राजस्थान में खासकर यह मेला जम्भेश्वर के समाधि स्थल पर लगाता है। इस मेले में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु अपने परम श्रद्धेय गुरु जांभोजी भगवान के दर्शनार्थ आते हैं। मुक्ति धाम मुकाम के साथ बिश्नोईयों के आद्य स्थल समराथल धोरा, जांभोजी के जन्म स्थल पीपासर, लोहावट साथरी, कांठ उत्तर प्रदेश, सोनड़ी, मेघावा और भिंयासर साथरी पर भी मेले का आयोजन किया जाता रहा है। 
 
कौन थे सद्गुरु जम्भेश्वर : गुरु जम्भेश्वर का पंवार राजपूत परिवार में 1451 में जन्म हुआ था। साल 1487 में जब जबरदस्त सूखा पड़ा तो जम्भो जी ने लोगो की बड़ी सेवा की थी। तभी उन्हीं से प्रेरित होकर कई लोगों ने उनके संप्रदाय को अपना लिया था। वन्य प्राणियों के प्रति बिश्नोई समाज की अटूट आस्था है। यह समाज मूल रूप से खेती और पशुपालन करके ही अपनी आजीविका का साधन जुटाते हैं, लेकिन वक्त के साथ उन्होंने व्यापार को बदला भी है।

Show comments

सभी देखें

भाई दूज 2026: 10 या 11 नवंबर? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, नियम और पौराणिक कथा

Chhath puja 2026: छठ पूजा का महापर्व कब से शुरू होगा और किस दिन है मुख्य अर्घ्य? जानें पूरा कार्यक्रम

Diwali 2026: दिवाली पर क्या होता है यम पंचक? जानें क्यों 5 दिनों के इस पर्व की होती है इतनी मान्यता

रवि पुष्य नक्षत्र: 5 आसान उपाय जो रातों-रात बदल सकते हैं किस्मत, जानिए क्या खरीदें और क्या नहीं

नरक चतुर्दशी पर क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली? जानिए इसके पीछे की मान्यता

सभी देखें

31 October Birthday: आपको 31 अक्‍टूबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज 31 अक्‍टूबर, 2026 का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का भविष्यफल

दीपावली पर क्‍यों खास हैं महाराष्ट्र के मशहूर अनारसे? जानिए इस मिठाई की दिलचस्प कहानी

दीपावली पर कैसे हुई शकरपारे बनाने की शुरुआत? जानिए इस पारंपरिक मिठाई की खासियत

दीपावली पर गुझिया के बिना क्यों अधूरी है मिठाई की थाली? जानिए इसके पीछे की खास परंपरा

अगला लेख