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लघुकथा : मंथन

शुक्रवार,मार्च 13, 2020
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इटली के महान मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट असोजियोली ने एक बार कहा था कि आजकल आध्‍यात्‍मिक कारणों से पैदा होने वाली उथल-पुथल बढ़ती जा रही है। क्‍योंकि ऐसे लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है जो जाने-अनजाने अधिक संपूर्ण जीवन की तलाश कर रहे हैं। साथ ही आधुनिक मानव ...
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भारत के एक महान राता थे ययाति। इक्ष्वाकु वंश के राजा नहुष के छः पुत्र थे- याति, ययाति, सयाति, अयाति, वियाति तथा कृति। याति परमज्ञानी थे तथा राज्य, लक्ष्मी आदि से विरक्त रहते थे इसलिए राजा नहुष ने अपने द्वितीय पुत्र ययाति का राज्यभिषके कर दिया।
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एक बार की बात है। अर्जुन इंद्र की सभा में उपस्थित थे। अर्जुन का प्रभाव और रूप देखकर स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी उस पर मोहित हो गई। उर्वशी ने अर्जुन को रिझाने की कोशिश की। उसने अर्जुन से प्रणय निवेदन किया, लेकिन अर्जुन ने खुद का नैतिक पतन नहीं होने दिया ...
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एक बहुत प्रसिद्ध सूफी फकीर गुरु था। जिसका नाम इब्न-अल-हुसैन था। उसके कई शिष्य थे। उसके एक शिष्य ने उसे पूछा- दुनिया में शांति और पवित्रता कैसे आएगी?
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नारी का अभिमान, प्रेममय उसका घर है, नारी का सम्मान, जगत में उसका वर है।
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बहुत पुराने समय की बात है। छुक्वो राज्य में एक सभ्य परिवार रहता था। एक दिन घर में पूर्वजों के लिए आयोजित रीति के पश्चात घर के मुखिया ने अतिथियों से पूजा में सहयोग के लिए धन्यवाद देने के लिए उन्हें एक केतली में शराब दी। सभी अतिथि आपस में बातें करने ...
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यह कहानी कई तरह से सुनाई जाती है, लेकिन ओशो रजनीश ने बड़े ही सुंदर तरीके से इसे सुनाया है। ओशी की 'अष्टावक्र महागीता' प्रवचन माला से यह कथा साभार।
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हॉलीवुड के फिल्म निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने किसी समय किसी प्रसंग में यह बात कही थी। आपको भी इससे सीख मिल सकती है। हालांकि ऐसे बातें पूर्व में कई विद्वान लोगों ने कही है। भाषा और संदर्भ बदलते रहते हैं, लेकिन सत्य वहीं का वहीं रहता है।
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कृष्ण काल में नंदा नाम की एक गाय थी। चारा चरते हुए झुंड से बिछड़ गई और वहां पहुंच गई जहां एक बाघ बैठा था। बाघ गरजते हुए नंदा पर टूट पड़ा। नंदा की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसे अपना नन्हा बछड़ा याद आने लगा। उसके आंसुओं की धारा बह निकली।
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ओशो रजनीश के पत्रों के संकलन से एक कथा- बात उस समय की है जब लाइट नहीं थी। लोगों ने अंधकार को दूर करने के बहुत उपाय सोचे, पर असफल रहे। तब एक चिंतक ने कहा- हम अंधकार को टोकरियों में भरकर गड्ढों में डाल दें। ऐसा करने से धीरे-धीरे अंधकार समाप्त हो
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यह कहानी ओशो रजनीश ने अपने किसी प्रवचन में सुनाई थी। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि संतों के या तीर्थंकरों के प्रवचन या उनकी शिक्षाएं कितनी काम की होती है।
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विवेकानंद एक बड़े विद्वान देवसेन के साथ ठहरे थे। उनके पास एक नई प्रकाशित पुस्‍तक थी। विवेकानंद ने कहा- क्‍या मैं इसे देख सकता हूं? देवसेन ने कहा- जरूर देख सकते हो, मैंने इसे बिलकुल नहीं पढ़ा है, क्योंकि यह अभी ही प्रकाशित हुई है।
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एक बार नारदजी एक पर्वत से गुजर रहे थे। अचानक उन्होंने देखा कि एक वटवृक्ष के नीचे एक तपस्वी तप कर रहा है। नारद के दिव्य प्रभाव से वह जाग गया और उसने प्रणाम करके पूछा- हे नारद! मुझे प्रभु के दर्शन कब होंगे?
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यह एक नीति कथा है। यह कहानी है न्याय के प्रति सजग राजा अभय सिंह की। अभय सिंह के राज्य में शांति और समृद्धि थी और उनके राज्य की सीमाएं दूर तक फैली थीं। इसका कारण यह था कि अभय सिंह जनता के बीच लोकप्रिय था। वह प्रजा की सुख शांति के लिए निरंतर कार्य ...
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एक व्यक्ति भगवान बुद्ध के पास आकर बोला- भगवन, मैं लगातार आपके प्रवचन सुन रहा हूं। आप बड़ी अच्छी-अच्छी बातें कहते हैं, लेकिन मेरे ऊपर इनका कोई असर नहीं होता। मैं गुस्सा खूब करता हूं, लालच, मद-मत्सर में रात-दिन फंसा रहता हूं। सच मानिए, आपकी बातों से ...
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यह कहानी ओशो रजनीश ने अपने किसी प्रवचन में सुनाई थी। यह सूफी संत मंसूर अल हल्लाज और उसके गुरु जुन्नैद की है। कहते हैं कि मंसूर पारसी से मुसलमान बन गया था। उसके गुरु जन्नैद ने उसे ज्ञान की शिक्षा दी थी।
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यूनान में एक प्रसिद्ध दार्शनिक हुए डायोनीज, जो सुकरात के शिष्य थे। उसकी अपनी जरूरतें बहुत ही कम थीं। वह भिक्षा लेकर अपना निर्वाह करते थे और जहां भी शरण मिल जाती थी वहीं रात गुजार लेते थे।
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जर्मन दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे ने कहा- शक्‍ति की आकांक्षा जहां-जहां दिखाई देती है उनमें एक है- समाज और व्‍यक्‍ति। मूल सिद्धांत सिर्फ व्‍यक्‍ति ही स्‍वयं को जिम्‍मेदार मानते हैं। समूह इसलिए बनाए गए है ताकि वे काम किए जाएं जिन्‍हें करने का साहस ...
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एक बार ओशो ने एक बड़ी ही रोचक कहानी सुनाई। राजमहल के निकट से कुछ बच्‍चे खेलते हुए निकले। एक बच्‍चे ने पत्‍थर उठा लिया और महल की खिड़की की तरफ फेंका। वह पत्‍थर ऊपर उठने लगा। उस पत्‍थर की जिंदगी में यह नया अनुभव था। यह अभूतपूर्व घटना थी, पत्‍थर का ऊपर ...
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