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लघुकथा : हिसाब

बुधवार,दिसंबर 23, 2020
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यह कहानी हमने कई बार सुनी होगी। ओशो रजनीश ने भी अपने किसी प्रवचन में इस कहानी को सुनाया था। यह कहानी किसने लिखी है यह तो हम नहीं जानते परंतु यह बहुत ही प्रचलित कहानी है। इस कहानी से आपको प्रेरणा मिलेगी की जीवन में सफलता अर्जित करने के लिए सबसे बड़ी ...
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ज़र्द पड़ चुके चेहरे के साथ सिर पर सुर्ख़ चुन्नी ओढ़ते हुए सिमरन ने राजीव से कहा...'सुनो..! पूजा की थाली जरा करीने से सजाना प्लीज... और देखना... कोई सामान छूट नहीं जाए।'
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हेमेंद्र जी को बदहवास हालत में दोनों बच्चों को संभालते देख उनके घर से लौटी बेचैन सुवि सोच रही थी.. पत्नी के ना रहने से घर क्या वास्तव में इतना बिखर जाता है..?'
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शेखर को पीछे से वाहन आने की आवाज सुनाई दी, उसका अंदाजा भी सही निकला जो पुलिस का ही वाहन था। शेखर ने उन्हें रोका और सम्पूर्ण घटनाक्रम फिर से बतलाया उस वाहन में करीब एक दर्जन पुलिस के जवान थे।
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एक संत नदी किनारे बैठे थे, तभी उन्होंने देखा एक बिच्छू पानी में गिर गया है। संत ने जल्दी से बिच्छू को हाथ में उठा लिया। बिच्छू ने संत को डंक मार दिया, जिससे संत का हाथ कांपा और बिच्छू पुन: पानी में गिरकर बहने लगा।
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कृष्ण काल में नंदा नाम की एक गाय थी। चारा चरते हुए झुंड से बिछड़ गई और वहां पहुंच गई जहां एक बाघ बैठा था। बाघ गरजते हुए नंदा पर टूट पड़ा। नंदा की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसे अपना नन्हा बछड़ा याद आने लगा। उसके आंसुओं की धारा बह निकली।
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काकी आज बहुत खिन्न नजर आ रही थी। पड़ोस में रहने वाली अनुष्का से रहा नहीं गया। वह पूछ बैठी- काकी क्या हुआ? आपको कभी ऐसे बैचेन और नाराज नहीं देखा।
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तापसी नाम था उसका,जैसी सुंदर सुशील थी वो वैसे ही उसके भाव विचार, उसको देखकर अनुमान लगाना कठिन था कि वो दो जवान बच्चों की मां है,उसके पति प्रशासनिक अधिकारी थे।
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मंच पर बड़े-बड़े अक्षरों में कार्यक्रम का विषय लिखा था अपनी मातृभाषा हिन्दी को कैसे बचाएं। उसका मन कह रहा था कि हिन्दी हमारी मातृभाषा है या मात्र एक भाषा....!
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कहावत तो सात वार नौ त्योहार की है, पर हमारी बई के तो सात वार में नौ बरत आते थे। कभी सोमवार के साथ ग्यारस आ जाती तो कभी गुरुवार के साथ प्रदोष।
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मास्क रज्जन बी के हाथ में था ।उन्होंने ध्यान से देखा और मुराद से कहा ये नीला मास्क तो दो तीन धुलाई में फट जाएगा इसमें क्या बड़ी बात है ।ऐसा मैं तुम्हें कपड़े का बना दूँगी ।दो तीन प्लीटस ही तो डालने हैं डालने हैं । मैं इससे भी बेहतर व मज़बूत बना सकती ...
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शशि की आदत थी महीने का बजट बनाने की। उन्होंने अपनी मां को यही करते देखा था। सुमेर को कोई मतलब नहीं था क्योंकि वे एक तय राशि अपनी पत्नी को
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'तेरा पत्र जब भी आता है, उसे बार-बार छूती हूं, बार-बार पढ़ती हूं। लगता है, तुझे ही स्पर्श कर रही हूं। तेरा पत्र तेरे लिए तो अक्षरों की चंद कतारें हैं, पर मेरे सामने तो तेरे जन्म से विवाह तक की सारी यादें फोटो एलबम की तरह खुलती चली जाती हैं। मुझे इस ...
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दोनों लगभग 60-62 की उम्र के साधारण कद-काठी के थे। पर कुछ तो खास बात थी उनमें, जो उन्हें खूबसूरत बना रही थी। आपस में कानाफूसी कर रहे थे। शायद काफी देर से आए बैठे थे। बॉबकट बालों वाली पत्नीजी ने सिलेक्सनुमा पायजामा व लंबी टीशर्ट-सी कुर्ती पहन रखी थी। ...
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लघुकथा : मंथन

शुक्रवार,मार्च 13, 2020
कृति ने खाने का डिब्बा खोला ही था कि मोबॉइल घनघना उठा। स्क्रीन में जो नाम चमका उसे देख कृति का मन कसैला हो उठा। मन किया कि बजने दे
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इटली के महान मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट असोजियोली ने एक बार कहा था कि आजकल आध्‍यात्‍मिक कारणों से पैदा होने वाली उथल-पुथल बढ़ती जा रही है। क्‍योंकि ऐसे लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है जो जाने-अनजाने अधिक संपूर्ण जीवन की तलाश कर रहे हैं। साथ ही आधुनिक मानव ...
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भारत के एक महान राता थे ययाति। इक्ष्वाकु वंश के राजा नहुष के छः पुत्र थे- याति, ययाति, सयाति, अयाति, वियाति तथा कृति। याति परमज्ञानी थे तथा राज्य, लक्ष्मी आदि से विरक्त रहते थे इसलिए राजा नहुष ने अपने द्वितीय पुत्र ययाति का राज्यभिषके कर दिया।
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एक बार की बात है। अर्जुन इंद्र की सभा में उपस्थित थे। अर्जुन का प्रभाव और रूप देखकर स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी उस पर मोहित हो गई। उर्वशी ने अर्जुन को रिझाने की कोशिश की। उसने अर्जुन से प्रणय निवेदन किया, लेकिन अर्जुन ने खुद का नैतिक पतन नहीं होने दिया ...
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एक बहुत प्रसिद्ध सूफी फकीर गुरु था। जिसका नाम इब्न-अल-हुसैन था। उसके कई शिष्य थे। उसके एक शिष्य ने उसे पूछा- दुनिया में शांति और पवित्रता कैसे आएगी?
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