sawan somwar

सारे बंधन छोड़ के देखो

- रोहित जैन

Written By WD
Updated: गुरुवार, 2 दिसंबर 2010 (17:03 IST)
ND
इक दिन खुद को तोड़ के देखो
सारे बंधन छोड़ के देखो

जिनकी राह तका करते हो
खुद ही उन तक दौड़ के देखो

अल ग- अलग तुम क्यों रहते हो
दिल से दिल को जोड़ के देखो

इन राहों से बचते हो तुम
इन राहों को मोड़ के देखो

सब गम इक पल में भागेंगे
माँ की बाहें ओढ़ के देखो

कितना कुछ बेकार भरा है
दिल की गागर फोड़ के देखो

सब के ईमाँ सोए से हैं
दुनिया को झकझोर के देखो

तुम्हे शिकायत है दुनिया से
‘रोहित’ ज़हन निचोड़ के देख ो।
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