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ठंडी अंधेरी रात में
अजेय
थोड़ी थोड़ी ले लोबन्धुअपनी आग में मिला करइसे बरतोऔर देखना इसका तापगुपचुप पहुँच जाती है चीज़ों में अपने आप!इस ठंडी अंधेरी रात मेंरोशनी की रोशनीगरमाईश की गरमाईशबोलो रक्खोगे मुठ्ठी भर?साभार : कृत्या प्रकाशन