ganesh chaturthi

कविता : शब्दों का संसार

Updated: शनिवार, 3 फ़रवरी 2018 (16:47 IST)
इस अज्ञानी के गागर में,
शब्दों का खजाना है।
शब्दों को लिखते-लिखते,
जीवन को संवारा है।
 
शब्दों की माला पिरोकर,
हार बनाया हूं।
उस हार को खुशबू देने,
बहार में आया हूं।
 
शब्दों को लिख-लिखकर,
जो नाम कमाया हूं।
शब्दों ने हमें रहना,
सोना सिखाया है।
 
शब्दों की कलियों ने,
चमन महकाया है।
शब्दों को लिख-लिखकर के,
जो महल बनाया हूं।
 
शब्द हैं प्रीतम के,
दिल की टूटी कहानी।
शब्द हैं भीष्म के,
प्रतिज्ञा की निशानी।
 
शब्दों को लिख-लिखकर के,
संतोष जो पाया हूं।
शब्द ही हैं सपने,
शब्द ही हैं अपने।
 
शब्द हंसाया-रुलाया,
शब्द लगे हम सहने।
शब्द को कविताओं के,
है प्रिय से प्यारे गहने।
 
शब्दों को लिख-लिखकर के,
प्रलय बनाया है।
लेखक के बारे में
शम्भू नाथ

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