suvichar

खिड़कियों में बैठा हुआ देश!

Updated: बुधवार, 16 नवंबर 2022 (20:10 IST)
जब नहीं होता देश सड़कों पर
वह कहीं भी नहीं होता
अपने ही घरों में भी नहीं!
 
फ़र्क़ है झरोखों, खिड़कियों
से देखने सड़कें
और देखने सड़क से
झरोखे और खिड़कियां
सिर्फ़ अंधेरा ही रिसता है बाहर
खिड़कियों की नसों से
डर का, कायरता का!
आकाश में खोदी गईं खंदकें
हैं खिड़कियां
चुराकर मुंह अंदर
ताकने बाहर का संताप सुराख़ों से!
 
हिम्मत का काम है
उतरना नीचे
पाटना सीढ़ियां, आना ज़मीन पर
खोलना बंद दरवाज़ा घर का
रखना पैर बाहर नंगी ज़मीन पर
करना सामना उन चेहरों का
नहीं आतीं नज़र जिनकी
तनी मुट्ठियां, चिपके हुए पेट,
बुझी आत्माएं खिड़कियों से!
 
सड़क से ही पड़ता है दिखाई
है बाक़ी अभी अंधेरा कितने घरों में
खिड़कियों से नहीं चलता पता
हो गई हैं सड़कें कितनी उदास
चले गए हैं लोग कितने
ख़ाली करके बस्तियां और शहर!
 
हो गया है ज़रूरी अब
करना सड़कों को आबाद
बना देना खिड़कियों को सुनसान
झांकती रहती हैं जो सड़कों की ओर
फहराती रहती हैं कांपते हुए हाथ
नायकों की तलाश में-
खलनायकों, तानाशाहों की ओर
बरसाती है पुष्प और मालाएं
अहंकारी माथों पर उनके!
 
इसके पहले कि हों जाएं
सड़कें खुद तब्दील सीढ़ियों में
हो गया है ज़रूरी बहुत
खिड़कियों का सड़क हो जाना!
 
लेखक के बारे में
श्रवण गर्ग
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

इंदौर में साहित्य की विविध विधाओं का संगम: जनवादी लेखक संघ का 150वाँ रचना पाठ संपन्न

इंदौर में आयोजित होगा राज्य स्तरीय- लक्ष्य मंथन योगासन प्रतियोगिता

दिलों को जोड़ने की एक मुहिम: जानिए राजीव गांधी की जयंती और 'सद्भावना दिवस' का कनेक्शन

आसमान से बरसेगा सेहत या संकट? जानिए बारिश का पानी पीने का सच!

अगला लेख