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तीन तलाक पर हिन्दी कविता...

Updated: सोमवार, 8 जनवरी 2018 (11:54 IST)
सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शन के प्रकाश में,
खोला है सुधारों का यह द्वार हमने।
अनेक जागरूक देशों की सुधार की पहल को,
किया है सहर्ष अंगीकार हमने।।1।।
 
कितनी निरीह अबलाओं, परित्यक्ताओं, रंजजदाओं,
की सुनी है कातर, करुण, हृदयदाही पुकार हमने।
धर्म, वर्ग, संप्रदाय, रूढ़ि, अंधविश्वासों से ऊपर उठकर,
मानवीय न्याय को दी है रफ्तार हमने।।2।।
 
दकियानूसी सोच, निहित स्वार्थ,
व्यवस्थाओं के दूषित रूपांतरणों को
किया है शालीनता से दरकिनार हमने।
एक साहसिक पहल से (अनगिनत अबलाओं की दुआओं के साथ),
आगामी पीढ़ियों पर किया है उपकार हमने।।3।।
 
 
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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