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हिन्दी कविता : अयोध्या में राम आए हैं

Updated: सोमवार, 22 जनवरी 2024 (15:20 IST)
घर-घर वंदनवार सजाओ।
घर के आंगन सजाओ रांगोली।
अयोध्या में राम आए हैं। 
 
दीये लगाओ, आरती उ‍तारो।
आज खेलों गुलालों की होली।
अयोध्या में राम आए हैं। 
 
साध हुई बरसों की पूरी।
प्रभु ने भर दी अरमानों की झोली।
अयोध्या में राम आए हैं। 
 
नाचे मोर, पपीहा गाएं।
मीठी लागे कोयलिया की बोली।
अयोध्या में राम आए हैं। 
 
आगे रथ पर राम-लखन हैं।
पीछे-पीछे सियारानी की डोली। 
अयोध्या में राम आए हैं। 
 
घर-घर बाजे आज बधाई।
मगन नाचे युवाओं की टोली।
अयोध्या में राम आए हैं। 
 
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लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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