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अग्रचिंतन, समग्रचिंतन...!

Updated: रविवार, 14 मई 2017 (22:58 IST)
प्रजातंत्र में विरोधी दलों का यों मिट जाना अच्छा नहीं है। 
सत्ता पार्टी के हाथों में निष्कंटक सत्ता का यों सिमट जाना अच्छा नहीं है। 
पर विरोधी दलों का संसद में गैर-जिम्मेदार, हंगामेबाजी से,
अब तक जो हुआ व्यवहार बचकाना अच्छा नहीं  है।।1।। 
 
जनता सब सुनती रहती है अपने कान हजार से। 
और देखती भी रहती है पैनी नज़र अपार से। 
अपने सामूहिक (अदृष्य) चिंतन से निर्णय लेती है सामयिक, सटीक,
कुकर्मियों को अंततः जमीन चटा देती है प्रबल प्रहार से।।2।। 
 
पिछले चुनावों में 'प्रजा' ने 'तन्त्र' को मजबूत ही किया है। 
कम्बख़्तो को नहीं बख्शा है, निष्ठावालों को पुरुस्कार दिया है। 
जनता के दरबार में न्याय है सर्वोपरि, मुरव्वतहीन,
अपना निष्पक्ष, सटीक निर्णय देकर सबको आगाह भी किया है।।3।। 
 
इसीलिए हम गाते हैं 'जन-गण-मन ' की जय हो। 
देश का जन-मत जागरूक, निष्पक्ष और निर्भय हो। 
वर्ग, धर्म या जाति, प्रलोभन सब से ऊपर उठकर,
भारत में दो मजबूत दलों वाली राजनीति का उदय हो।।4।। 
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें
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