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कविता : श्रावण माह में शिव वंदना

Updated: शनिवार, 11 अगस्त 2018 (17:22 IST)
(मुक्तक)
 
शिव है अंत:शक्ति, शिव सबका संयोग।
शिव को जो जपता रहे, सहे न कभी वियोग।
शिव सद्गुण विकसित करें, जाग्रत मन-मस्तिष्क
शिव की पूजन से बने, जीवन सुखद सुयोग।
 
आत्मज्ञान और मुक्ति का, शिव हैं आत्मस्वरूप।
शिव समान दाता नहीं, भक्ति-भोग अनुरूप।
शिव के बिन तन शव रहे, मिले न मुक्ति मार्ग।
शिव देवों के देव हैं, शिव शक्ति प्रतिरूप।
 
शिव अभिषेक अमोघ है, हर्ता दुर्धर पाप।
शिव पूजन मन से हरे, कोटि जन्म संताप।
पुण्य संपदा और धन, शिव स्तुति परिणाम।
बिल्वपत्र हरता सदा, दैहिक दैविक ताप।
 
गुरुओं के भी हैं गुरु, शिव हैं मूलाधार।
मन वांछित पूरित करें, शिव की शक्ति अपार।
शिव आत्मा के अधीश्वर, शिव ऊर्जा के मूल।
शिव परात्पर ब्रह्म हैं, शिव हैं जगत आधार।
 
श्रावण माह में शिव कृपा, बरसे मेह समान।
सोमवार का व्रत रखो, शिव को अपना मान।
श्रावण में अभिषेक से, मिलते पुण्य हजार।
जीवन को प्रगति मिले, मिलता सुख-सम्मान।
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

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