biodatamaker
✕

नई कविता : एक बार फिर आ जाओ कान्हा

Updated: गुरुवार, 17 अगस्त 2017 (15:30 IST)
देवेंन्द्र सोनी
एक बार फिर आ जाओ कान्हा
कलियुग कर रहा पुकार  
एक बार फिर आ जाओ 
हम सबके प्रिय कान्हा ।
 
खो गया है, माखन-मिश्री
गऊ माता लाचार यहां
सुनने को मुरली-धुन
करते फिर गुहार यहां ।
 
वही दुर्योधन, वही दुशासन 
वही चीरहरण, वही अराजकता 
पसरी है, फिर से यहां ओ
रिश्तों के ताने-बाने भी अब तो
खो बैठे हैं सुध- बुध अपनी।
 
लगा है नौनिहालों का भविष्य दांव पर 
हो गए हैं कई कालिया नाग यहां
एक बार फिर मथने उनको
आ जाओ हम सबके कान्हा ।
 
आंखों पर भी बांध ली है पट्टी
न्याय की गांधारी ने 
पहुंच गया है फिर चरम पर
सत्ता का मद अब यहां।
 
पांडव सी बन गई है जनता
सच्चा कर्म बता जाओ 
एक बार फिर से आकर तुम कान्हा
गीता का पाठ पढ़ा जाओ।

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख