biodatamaker

कविता : ख्वाब

Updated: बुधवार, 31 जुलाई 2019 (15:23 IST)
रचयिता- संगीता केसवानी
 
अजीब दास्तान है ख्वाबों की,
हक़ीक़त से परे, फिर भी नज़रबंद रहते हैं।
 
खोए सेहर के उजालों में,
निशा में समाए रहते हैं।
 
बदरंग इस दुनिया में,
रंगीन जिंदगियां सजाए रखते हैं।
 
बिखरी खाली झोली में,
उम्मीदों की रोशनी भरते हैं।
 
दूर क्षितिज खड़ी मंजिलों को,
कदमों से नहीं
हौसलों से करीब कर जाते हैं।
 
थकी-हारी इन सांसों में,
जीने की नई उमंग भर जाते हैं।
 
यूं तेरे-मेरे ख्वाब मिलकर,
हक़ीक़त का घरौंदा सजा जाते हैं।

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

अगला लेख